Spread the love

बड़ौत ::- दहेज व कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ आवाज उठाकर समाज में एक नया बदलाव लाने के लिए खापों के चौधरी आवाज उठाएंगे। बेटियों को आगे बढ़ाकर परिवार का कुलदीपक भी बनाया जाएगा। मिशन शक्ति अभियान के तहत बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के लिए खाप चौधरियों को साथ लेकर प्रशासन ने यह मुहिम शुरू की। इसके लिए बड़ौत की पट्टी चौधरान में देशखाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह के आवास पर खाप चौधरियों के साथ डीएम अस्मिता लाल ने संवाद किया। डीएम अस्मिता लाल ने कहा कि दहेज ऐसी प्रथा है जो बेटियों की आत्महत्या व हत्या को जन्म देती है। ऐसी प्रथा को बंद करना चाहिए। कन्या भ्रूण हत्या सबसे बड़ा पाप है और इस पाप से सभी को बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब समय बदलाव का आ गया है कि बेटियों के जन्म को उत्सव के रूप में मनाएं। खाप चौधरियों ने इस मुहिम में भागीदारी निभाते हुए आगे बढ़ाने का वादा किया। वहीं समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने का फैसला भी लिया गया। डीएम ने खाप चौधरियों को एक-एक घड़ी व दीपक देकर सम्मानित किया। इसके बाद सभी ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ लिखे बैनर पर अपने हस्ताक्षर कर मुहिम को सफल बनाने का संकल्प लिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

×