NEET-CBSE पेपर लीक के मामले में हमारी विश्वगुरु सरकार और पूरा सिस्टम इतना बैकफुट पर क्यों था? क्योंकि भाई साहब, लाख कोशिशों के बाद भी उन्हें इस महाघोटाले में कोई मुस्लिम एंगल नहीं मिल पा रहा था। फिर शुरू हुई असली स्क्रिप्ट और ध्यान भटकाने की क्रोनोलॉजी। पहले छात्रों और पेपर लीक के इस गंभीर विषय को चालाकी से घुमाकर टीचर्स बनाम झालमुड़ी मीडिया बनाया गया। जब वहाँ दाल नहीं गली, तो इसे कोचिंग माफिया का नाम दे दिया गया। और अंत में, सिस्टम ने अपना सबसे पुराना और आजमाया हुआ ट्रंप कार्ड खेल ही दिया। उस पूरी कोचिंग इंडस्ट्री में से एक मुस्लिम टीचर यानी खान सर को खोज निकाला, और मामले में जबरदस्ती हिंदू-मुसलमान घुसा दिया। अब पेपर लीक का असली मुद्दा गया तेल लेने।ज़मीनी हकीकत और आम जीवन को देखिए। एक आम विद्यार्थी को रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ता कि उसे पढ़ाने वाला टीचर हिंदू है, मुसलमान है, ईसाई है, यहूदी है, एलियन है, महिला है, बूढ़ा है, जवान है या फिर कोई AI रोबोट है। उसे सिर्फ अच्छी शिक्षा और अपने भविष्य से मतलब है। लेकिन, सिस्टम की दलाली करने वाली मीडिया और सोशल मीडिया पर अचानक क्या तमाशा शुरू हो गया? खान सर मत बोलिए फैजल खान कहिए, फैजल खान का पड़ोसी क्या बोला, कोचिंग सील होगा, खान जी के पास कितनी संपत्ति है, एक दिन में ख़ान सर कितना कमाते हैं, यूपी के हैं तो पटना में क्या कर रहे हैं, और अंत में उन्हें जिहादी तक घोषित कर दिया गया।

subhashchand4

Bysubhashchand4

Jun 13, 2026
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खान सर की संपत्ति कितनी है और उनका पड़ोसी उनके बारे में क्या सोचता है, इन सब फालतू बातों पर शो करने वाली मीडिया में हिम्मत है तो कभी अडानी पर शो करके दिखाए कि उनकी संपत्ति अचानक इतनी कैसे बढ़ गई। आम लोगों के पास अपना कैमरा और माइक लेकर जाओ और पूछो अंबानी-अडानी के बारे में, तब देखना लोग क्या बोलते हैं। कभी अपनी इसी चाटुकारिता वाली पत्रकारिता पर सरेआम लोगों से कैमरे पर राय मांग कर देखो। मैं डंके की चोट पर दावे के साथ कह सकता हूँ कि तुम ये काम करने की हिम्मत कभी नहीं जुटा पाओगे। तुम्हारी इतनी हैसियत ही नहीं है कि अंबानी-अडानी पर शो कर सको, या पूछ सको कि महामानव का उनसे क्या संबंध है। सबसे गज़ब का दोगलापन तो सत्ता में बैठे उन मंत्रियों और विधायकों का है, जिनके मुँह से NEET और पेपर लीक पर भाप तक नहीं निकल रही थी। लेकिन जैसे ही इस रची-गढ़ी स्क्रिप्ट में एक मुस्लिम शिक्षक की एंट्री हुई, ये सब लपक कर बाहर आ गए और मेलोडी मीडिया के प्राइम टाइम शोज़ में बैठकर ज्ञान बांचने लगे। जो नफरती चिंटू सोशल मीडिया पर कल तक खान सर को एक अच्छा मुसलमान मानते थे, आज इन सो-कॉल्ड राष्ट्रवादियों के लिए वो रातों-रात पाकिस्तानी हो गए। है ना कमाल की बात!

अरे भाई साहब, खान सर कोचिंग माफिया हैं, पाकिस्तानी जिहादी हैं, या कोई बम-बारूद रखने वाले गुंडे-मवाली हैं… यह सब तय करने का काम इस देश की अदालत का है। लेकिन, असल मुद्दे से जनता को भटकाने के लिए मीडिया वाले अचानक खान सर पर डॉक्युमेंट्री बनाने लगे, और कुछ कथित यूट्यूबर्स और पत्तलकारों ने चंद व्यूज़ के लिए हिंदू-मुस्लिम एंगल डालकर अनगिनत रील्स और वीडियो पेल दिए। पूरा दिन न्यूज़ चैनलों पर सिर्फ खान सर पर चर्चा हो रही है, वाह गज़ब! यानी एकदम साफ है कि इस पूरे सर्कस का इकलौता और मुख्य मकसद सिर्फ एक है— देश को असली मुद्दे से डाइवर्ट करना। और असल मुद्दा है CBSE-NEET पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। इसे छोड़कर बाकी हर चैनल और डिबेट में सिर्फ फालतू की बकवास चल रही है।
सिस्टम के इन डायरेक्टरों को लगता है कि वो वही अपनी पुरानी, घिसी-पिटी हिंदू-मुस्लिम वाली स्क्रिप्ट रचेंगे जो पहले कामयाब हो जाती थी, और जनता फिर बेवकूफ बन जाएगी। लेकिन वो भूल गए हैं कि अब काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ेगी। छात्र और आम जनता अब इस नफरती चक्रव्यूह को समझ चुके हैं, अब यह सब नहीं चलेगा!

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