- कश्यप समाज की सभी 17 जातियों की देशव्यापी सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक एवं जातिगत गणना कराई जाए।
- वास्तविक जनसंख्या के आधार पर सभी 17 जातियों को शिक्षा, रोजगार, राजनीति, प्रशासन, न्यायपालिका, सरकारी संस्थानों तथा सभी सार्वजनिक संसाधनों में जनसंख्या के अनुपात में हिस्सेदारी दी जाए।
- जिस प्रकार सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया है, उसी आधार पर कश्यप समाज की सभी 17 जातियों को देश के सभी संसाधनों, संस्थानों और सेवाओं में कम से कम 30 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए अथवा वास्तविक जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व दिया जाए।
- प्राथमिक विद्यालय, उच्च प्राथमिक विद्यालय, माध्यमिक विद्यालय, इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, स्नातकोत्तर महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय तथा सभी शैक्षिक संस्थानों में छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों, प्रबंध समितियों और निर्णय लेने वाली संस्थाओं में समाज की जनसंख्या के अनुपात में भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
- शिक्षा व्यवस्था को पूर्णतः निःशुल्क किया जाए तथा निजी विद्यालयों के राष्ट्रीयकरण पर विचार किया जाए ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी नागरिकों को समान रूप से उपलब्ध हो।
- राष्ट्रीय, राज्य, कमिश्नरी, जिला, तहसील, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर अभिभावक आधारित स्कूल मैनेजमेंट कमेटियां गठित कर उन्हें प्रभावी अधिकार दिए जाएं।
- स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, डॉक्टर, विशेषज्ञ चिकित्सक, प्रशासनिक अधिकारी, निदेशक, सचिव तथा नीति निर्माण स्तर तक समाज की जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
- केंद्र और राज्य सरकारों के सभी विभागों में फोर्थ क्लास, थर्ड क्लास, सेकंड क्लास, फर्स्ट क्लास अधिकारियों, सचिवों तथा शीर्ष प्रशासनिक पदों पर जनसंख्या के अनुपात में भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
- न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका, आयोगों, बोर्डों, निगमों, परिषदों, प्राधिकरणों तथा सभी संवैधानिक संस्थाओं में समाज को समुचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।
- सरकारी ठेकों, परियोजनाओं, खरीद प्रक्रियाओं, निर्माण कार्यों, सार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी सप्लाई सिस्टम में जनसंख्या के अनुपात में भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
- जल, जंगल, जमीन, तालाब, झील, नदियां, जलाशय, मत्स्य संसाधन तथा प्राकृतिक संपत्तियों में समाज को उसकी जनसंख्या और परंपरागत अधिकारों के अनुरूप हिस्सेदारी दी जाए।
- मत्स्य पालन, जल प्रबंधन तथा जल आधारित रोजगारों में समाज को प्राथमिक अवसर प्रदान किए जाएं।
- गन्ना क्रेशर संचालक, मत्स्यजीवी, पशुपालक तथा अन्य परंपरागत व्यवसायों को उद्योग का दर्जा देकर भूमि, सब्सिडी, ऋण, बिजली, पानी और बाजार उपलब्ध कराया जाए।
- प्रत्येक गन्ना क्रेशर इकाई पर कम से कम 20 श्रमिकों के लिए विशेष रोजगार सहायता योजना लागू की जाए।
- समाज के परंपरागत व्यवसायों के संरक्षण हेतु विशेष आर्थिक पैकेज घोषित किया जाए ताकि पलायन रोका जा सके।
- व्यापार, उद्योग, सेवा क्षेत्र, ई-कॉमर्स, स्टार्टअप, परिवहन, निर्माण, तकनीकी क्षेत्र, मीडिया, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और सभी प्रकार के व्यवसायों में समाज को भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
- समाज के युवाओं, महिलाओं और उद्यमियों को व्यवसाय स्थापित करने हेतु प्रशिक्षण, कौशल विकास, उद्यमिता विकास कार्यक्रम, अनुदान, सब्सिडी, कम ब्याज ऋण तथा विपणन सहायता उपलब्ध कराई जाए।
- सरकारी खरीद, ई-टेंडरिंग तथा सार्वजनिक क्षेत्र की खरीद प्रक्रियाओं में समाज के उद्यमियों को प्राथमिक अवसर दिए जाएं।
- धार्मिक स्थलों, ट्रस्टों, मंदिरों, आश्रमों और धर्मस्थलों की प्रबंधन समितियों में जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
- मीडिया संस्थानों, समाचार चैनलों, समाचार पत्रों, डिजिटल मीडिया, निजी कंपनियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों तथा कॉर्पोरेट क्षेत्र में समाज को समुचित अवसर और प्रतिनिधित्व दिया जाए।
- ग्रामीण गरीब महिलाओं को पैतृक एवं कृषि भूमि में बराबरी का अधिकार सुनिश्चित किया जाए।
- आवासहीन एवं छोटे भूखंडों पर रहने वाले परिवारों को बड़े आवासीय पट्टे उपलब्ध कराए जाएं।
- पशुपालन करने वाली महिलाओं को चारा उत्पादन एवं पशुपालन हेतु भूमि पट्टे दिए जाएं ताकि वे आत्मसम्मान के साथ जीवनयापन कर सकें।
- समाज की सभी महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता कार्यक्रमों में प्राथमिकता दी जाए।
- समाज के सभी परिवारों के राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र तथा अन्य सरकारी दस्तावेजों का विशेष अभियान चलाकर निःशुल्क सुधार कराया जाए।
- दस्तावेज संबंधी त्रुटियों के कारण किसी भी व्यक्ति को किसी सरकारी योजना से वंचित न किया जाए।
- प्रत्येक ग्राम, ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर पर निःशुल्क दस्तावेज सहायता एवं अधिकार संरक्षण केंद्र स्थापित किए जाएं।
- समाज के प्रत्येक पात्र व्यक्ति को केंद्र एवं राज्य सरकार की सभी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित किया जाए।
- समाज के युवाओं, महिलाओं, किसानों, मजदूरों, पशुपालकों, मत्स्यजीवियों और उद्यमियों के लिए विशेष प्रशिक्षण मिशन चलाया जाए।
- कश्यप समाज के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक विकास आयोग गठित किया जाए।
- समाज की वास्तविक जनसंख्या के आधार पर संसद, विधानसभा, विधान परिषद, स्थानीय निकायों, नगर निकायों और पंचायतों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
- समाज को राष्ट्र निर्माण, आर्थिक विकास, सामाजिक सुधार, शिक्षा सुधार, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय विकास योजनाओं में भागीदार बनाया जाए।
- केंद्र एवं राज्य सरकारें “कश्यप समाज सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण, दस्तावेज सुधार एवं अधिकार संरक्षण मिशन” प्रारंभ करें और समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर उसका क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
- कश्यप समाज सहित सभी श्रमशील, वंचित एवं पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े समुदायों को सम्मान, सुरक्षा, अवसर और समान भागीदारी प्रदान कर भारत को सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता और समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जाए।
हम आशा करते हैं कि संविधान की भावना, सामाजिक न्याय के सिद्धांत और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप उपरोक्त मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
✍️AKS
