तथागत महामानव गौतम बुद्ध आडंबर पाखण्ड में धक्का खाते हुए ब्राह्मणों पण्डो पुरोहितों के बताए हुए बातों का वीना परीक्षण किए हुए ईश्वर की प्राप्ति के लिए गया के ब्यावान जंगलों में तपस्या करने भूखे प्यासे बैठ गए थे जब वे 27 दिनों तक विकट तपस्या करते हुए मूर्छित हो कर उस वृक्ष के नीचे सो गए थे तो जंगल में सुजाता पतझड़ के मौसम में पत्ता चुनने गई थी उसे उस पेड़ के नीचे ढेर देख कर पत्ता उठाने लगीं तो उसे मूर्छित एक मानव मिला था कई दिनों से भूखा प्यासा वह मानव मरणासन्न स्थिति में था उसके मुंह पर पानी की छींटा मारी मुंह में अपनी मुंह डाल कर हवा डाली उसके मुंह में पंजीरी डाल कर पानी दी कई जतन करने के बाद हल्की सी चेतन आई फिर उसे उठा कर अपनी निवास में ला कर होश में लाने की चेष्टा की तो कई घंटों में उनका आंख खुला अपने को सिद्धार्थ ने किसी गृह में देख कर पूछे थे मैं तो पीपल वृक्ष के नीचे ईश्वर प्राप्ति के लिए तपस्या पर बैठा था मुझे यहां कौन लाया उस वक्त सुजाता भीलनी निषाद सिद्धार्थ को डांटते हुए पूछी थी यहां आप क्यों आए थे आप कौन हैं कैसे आए थे सिद्धार्थ ने बताए थे पण्डो पुरोहितों के बताए गए विधि से प्रभावित हो कर में ईश्वर प्राप्ति के लिए यहां आकर तपस्या कर रहा था सुजात ने पूछी थी की क्या आपको ईश्वर मिल गए उन्होंने जवाब दिए नहीं मिला है? सुजाता ने सिद्धार्थ को बोली बुद्धी तनिक भी नहीं है यहां बियाबान जंगल में पण्डो पुरोहितों ने यहां भेज कर जंगली जानवरों का शिकार बनाना चाहते थे जिससे आपकी मौत हो जाए पण्डो पुरोहितों का रस्ते का रुकावट साफ हो जाए आपको मौत के मुंह में पण्डो पुरोहितों ने भेज दिए थे मैंने आपको मरणासन्न स्थिति में देख कर दया आई और अपनी निवास में लाकर आपकी उपचार की उसके बाद आपको होश आई हैं आप कहां के रहने वाले हैं सिद्धार्थ ने सुजाता को बताए मैं महाराजा शुद्धोधन का बड़ा पुत्र हूं कपिलवस्तु गणराज्य के मेरे पिता राजा हैं सुजात ने सिद्धार्थ को बोली बुद्धी से तो काम लेते ईश्वर पृथ्वी पर कहीं नहीं हैं उसके बाद सिद्धार्थ ने सुजाता के पैरों पर गिर कर बोले चला था ईश्वर को ढूंढने लेकिन मुझे ईश्वर तो नहीं मिला ईश्वर जैसी जीवन दायिनी ज्ञान दायनीय गुरु आज मिली जो मानवता करुणा बंधुत्व की पथप्रदर्शक ज्ञान मिला हैं आज से मैं मानवता करुणा बंधुत्व शांति के लिए कार्य करने में सम्पूर्ण जीवन अर्पित कर रहा हूं आडंबर पाखण्ड प्रपंच के विरुद्ध में तथागत महामानव गौतम बुद्ध उसी दिन से बन गए सुजाता नहीं होती तो बुद्ध नहीं होते यह बाते सत्य है ! सुजात ने सिद्धार्थ को बताई प्राकृतिक ही ईश्वर है यही जीवन देती हैं प्राकृतिक की रक्षा जितनी करोगे उतना ही जीवन शांत सुखी और सफल होगी
तथागत महामानव गौतम बुद्ध ने कहा है पहले जानो फिर छानो उसके बाद में सच है तो मानो नहीं है तो नहीं मानो
ब्राह्मणों ने सम्पूर्ण देश का अपने कपोलकल्पिय ग्रंथों वेदों पुराणों के द्वारा झूठी मनगढ़ंत कहानी लिख कर समाज को गुमराह करते हुए मनवाया इसलिए समाज का बेड़ा गर्क हो गया है और पढ़े लिखे समाज के विद्वान लोग उसके झूठ को प्रचारित करके पाखंड फैलाए हैं!
महर्षि वेदव्यास का उत्पति जन्म की कहानी बड़ा ही रोचक है जो विश्वाश करने के लायक ही नहीं है!
महान आश्चर्यजनक बाते
श्रीमदभागवत में लिखा है महर्षि पराशर ने एक दिन यमुना नदी पार करने के लिए यमुना नदी के किनारे आए थे तो घाट कौन सा था यह बात श्रीमद् भागवत में कहीं नहीं लिखा है अटकलें लगा कर लिख दिया गया है! उस घाट पर केवट राज का भी नाम नहीं लिखा है कौन केवट मल्लाह थे क्या नाम था नहीं लिखा बाद में आलोचना के भय से गीता प्रेस गोरखपुर बाले ने दशराज केवट लिखा है पुरानी दो सौ साल पुरानी श्रीमद् भागवत में नाम नहीं लिखा हुआ है अभी के एडिशन में दशराज केवट का नाम लिख दिए गए हैं
पाराशर महर्षि ने मच्छोदरी उर्फ सत्यवती से बोले बच्ची मुझे शीघ्र उस पार जाना है इसलिए नाव से पार करा दो सत्यवती ने महर्षि पराशर को नाव में बैठा कर उस वक्त पार करने के लिए नाव खेवने लगी यमुना नदी के बीच मजधार में गई थी तो महर्षि पराशर ने उस बच्ची से बोले की मैं तुझसे रति क्रिया करूंगा मै तुम्हारी सुंदरता पर मोहित हो गया हूं लेखक ने उसे बलात्कारी व्यभिचारी नहीं लिखा उसे महर्षि लिखा है महर्षि पराशर से दस वर्ष की छोटी बच्ची ने बोली महर्षि आप संन्यासी है और ऐसी नीच काम पिपासा बाली बात बोल रहे हैं क्यों?
मच्योदरी उर्फ सत्यवती ने लोक लाज की बात करती हुई बोली ये कुकर्म करते हुए कोई देख लेंगे तो मुझे प्रताड़ित करेंगे मै अपनी साधना से बादल पैदा कर दूंगा तुम्हे कुछ नहीं होगा सिर्फ आधा घंटे में तुम्हे बच्चे भी हो जाएगी और मेरा काम पिपासा शांत हो जाएगा इस तरह से महर्षि पराशर ने सत्यवती की शील हरण कर दिए उससे जो बच्चा पैदा हुआ था उसे यमुना नदी में फेंक दी जब यमुना नदी में सत्यवती और महर्षि पराशर दोनों मिल कर उस बच्चे को यमुना नदी में फेंके होंगे वह बच्चा कैसे बच गया उसे नदी के जानवर मछली क्या खाया नहीं था क्या वह बच्चा डूबा नहीं था कैसे वह बच्चा बच गया आश्चर्यजनक नहीं महा आश्चर्य बाते है?
सवाल उठता है की आधा घंटे या एक घंटे में कोई भी मनुष्य या जीव का जन्म हो सकता हैं?
आजतक उस किताब श्रीमद् भागवत को बिना जांचे परखे
कैसे विश्वाश कर लिए है लोग और ब्राह्मणों की झूठी कहानी कपोलकल्पित कहानियों को ग्रंथ कैसे मानते आए हुए हैं उस विद्वान व्यक्ति का दायित्व और कर्तव्य बनाता है इस झूठी कपोलकल्पित कहानियों का पर्दाफाश करें अन्यथा उस ब्राह्मणों के झूठ प्रपंच को प्रचारित करने में उस विद्वान महा विद्वान महोदय का इस समाज का सत्यानाश करने में हाथ है और उस झूठे वेदव्यास के नाम पर संगठन चला रहे है तो समाज को गर्त में धकेलने में उस महाशय का भी पूर्ण योगदान है उनको अभी भी ज्ञान नहीं है उस ब्राह्मणों के कुकर्मो उनका हाथ है वे महाशय समाज को गड्ढे में धकेलने वाले वह क्या बचा सकते है उस वेदव्यास संगठन को भंग अविलंब करके उन्होंने जो ब्राह्मणों के कुकर्म को मिटने के लिए प्रायश्चित करे अन्यथा वो झूठा व्यक्ति है उनसे समाज सावधान हो जाए जैसे गंदे कपड़े को गंदे पानी से नहीं धोया जा सकता है उसे साफ पानी से ही धो कर साफ किया जाता हैं
समाज के विद्वान लोग अपनी पेट पालने में मस्त व्यस्त होते हुए ब्राह्मणों के झूठ को प्रचारित करते हैं दोषी वे ही सबसे ज्यादा है विद्वान हो कर सामाजिक दुर्गुणों को दूर क्या करेंगे उल्टे सत्यवती की चरित्र हनन की कहानी प्रेम से सुनते हैं उस वक्त उनको शर्म नहीं आता है जबकि महाभारत कहानी जब से भारत में ब्राह्मणों ने लिखा है उसी वक्त से समाज में इस शांति के द्वीप में अशांति आ गया है भाई भाई का दुश्मन बाप बेटा का दुश्मन मां बेटी में झगड़ा लड़ाई होना शुरु हो गया है ब्राह्मणों ने सत्यानाश कर दिया है मानसिक शारीरिक बौद्धिक धार्मिक गुलाम बना कर अपनी बिना धन का व्यापार जोड़ों से चला कर 120 करोड़ लोगों को लुट रहा है उसमें हमारे समाज का पढ़ा लिखा विद्वान लोग भी उसी ग्रंथों के आधार बना कर पाखंड फैलाने में सहयोग दे रहा है समाज को दीमक की तरह चाट रहा है जय निषादराज साहब आनन्द निषाद जी का विचारधारा का ब्लॉग है सुरेश निषाद के कलम से
