सुल्तान गंज भागलपुर बिहार के बानापुरा जोड़ गांव आज का तिलका मांझी ग्राम से जाना जाता हैं पिता सुंदर मुर्मू मांझी माता पानो मुर्मू मांझी की सुपुत्र तिलका का जन्म 11 फरवरी 1750 को एक गरीब परिवार में जन्म ले कर जो बड़े बड़े लोग नहीं कर पाए वह तिलका मांझी निषाद ने भारत के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन का बिगुल 13 जनवरी 1780 को फूक कर तत्कालीन तीन राज्यों के गवर्नरहै क्लीन लॉयड को अपने तीर से शिकार बना कर हत्या कर उसके खून से तिलक लगा कर अंग्रेजी सत्ता को खुली चुनौती दे कर विश्व में तहलका मचा दिया था
सुल्तान गंज के जागीरदार जमींदार नारायण सिंह ठाकुड़ था तत्कालीन बिहार बंगाल उड़ीसा तीन राज्यों का गवर्नर क्लीन लॉयड था जो सख्ती से जमींदारों से लगान वसूलता था लगान की वसूली से तंग आ कर नारायण सिंह जागीरदार ने तिलका मांझी को अपने हवेली पर बुलाया और बोला था की तुम इस देश के मुल्की लाट को अपने तीर से मार दोगे तो हमारा देश आजाद हो जाएगा और लगान नहीं लेगा अकाल नहीं होगा यहां से भाग जाएगा सभी लगान ये अंग्रेज लोग वसूल कर इंग्लेंड भेज देते है आग उसे तीर मार कर भगा दोगे तो मैं तुम्हें 50 रुपया दूंगा और मै तुम्हे उनसे बचा लूंगावह आठ घोड़ों पर सवार होकर ईधर से ही गुजरेगा
नारायण सिंह जागीरदार की बात सुन कर तिलका मांझी के खून में उबाल आ गया उसने आव देखा ना ताव देखा पूछा जागीरदार साहब कैसे करना होगा नारायण सिंह जागीरदार ने बताया की इस रोड के किनारे पर एक ताड़ का पेड़ है उसके ऊपर धनुष वाण लेकर ऊपर चढ़ जाओ ज्यों ही आठ घोड़ों के एक बग्गी दिखाई देगा उसके ऊपर तीर से मारना है
नारायण सिंह जागीरदार के कहने पर तिलका मांझी ने अपने इंतकाम को अंजाम देने के लिए तीर धनुष लेकर ताड़ के पेड़ पर चढ़ कर बैठ गया और क्लीन लॉयड गवर्नर का इंतजार करने लगा 13 जनवरी 1780 को ज्यों ही क्लीन लॉयड अठ बग्गी आता हुआ देखा त्यों ही तिलका मांझी ने धनुष वाण की प्रत्यंचा तान कर क्लीन लॉयड को निशाने लगा कर तीर मारा तीर क्लीन लॉयड के गले मे लगा वह ज्यों ही गिरा उसके बाद लगातार 36 तीर दना दन दे मारा क्लीन लॉयड वहीं ढेर हो गया सुल्तान गंज में क्लीन लॉयड की मौत खबर जंगल में लगी आग की तरह फैल गई कोलकाता में तत्कालीन गवर्न जनरल वारेन हेस्टिंग को सूचना मिलते ही अपने हजारों फौज के साथ सुल्तान गंज को घेर लिया तिलका मांझी दहसत से राज महल की पहाड़ियों के जंगल में छुप गया इधर नारायण सिंह जागीरदार ने वारेन हेस्टिंग को मुखबिरी करने के लिए भागलपुर पहुंच कर वारेन हेस्टिंग को सूचना दे दिया की आदिवासी मांझी निषाद समाज क्राइम किया है आदतन अपराधी हैं इनको घेर कर अंत कीजिए नहीं तो आगे विद्रोह होगा जिसे दवा नहीं सकते हैं वारेन हेस्टिंग के नेतृत्व में 13 जनवरी 1780 से 13 जनवरी 1785 तक तिलका मांझी निषाद के नेतृत्व में हज़ारों मांझी समाज के जवाज़ नौजवान महिला पुरुषों ने अंग्रेजी सत्ता से लड़ते रहे हजारों फिरंगी सेना मारे गए अंत में दस हज़ार फिरंगी सेनाओ ने वारेन हेस्टिंग के नेतृत्व में राज महल की पहाड़ियों को घेर लिया अंत में 2 हजार मांझी समाज के जवाज़ लड़ाका को पकड़ लिया गया तिलका को राज महल के पहाड़िया से गिरफ्तार कर के बांध करके चार घोड़ों से घसीटता हुआ भागलपुर विच शहर में पुरानी बरगद के पेड़ में लटका कर 13 जनवरी 1785 को फांसी दिया गया था साथ में उनके 2 हजार साथियों को भी उसी पेड़ पर लटका कर फांसी दिए गए थे उसी स्थान को आज बूढ़ा नाथ का स्थान कहा जाता हैं वहीं पर बूढ़ा नाथ का मंदिर बना दिया गया है तिलका ने अपने तीर से क्लीन लॉयड को मार कर तिलक किया था भारत की आजादी का पहला बिगुल 13 जनवरी 178 को बजाया था
शहीदों के मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले
वतन पे मरने वालो की यही अंतिम निशा होगी
जय निषाद राज जय तिलका मांझी जय फूलन जय डा जोगेंद्र नाथ मंडल जय विरसा मुंडा साहब आनन्द निषाद जी के ब्लॉग से सुरेश निषाद के कलम से

