भारत की जनगणना-2027 – जनसामान्य के लिए अपीलप्रिय निवासियों,जनगणना-2027 एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व है, जिसमें आपकी सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। यह केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के विकास की आधारशिला है। जनगणना के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार एवं आधारभूत संरचना जैसी विभिन्न योजनाओं का निर्माण एवं संसाधनों का उचित वितरण सुनिश्चित किया जाता है।आपकी सही, पूर्ण एवं समय पर दी गई जानकारी यह सुनिश्चित करती है कि आपके क्षेत्र को उसका उचित अधिकार एवं विकास के अवसर प्राप्त हों। अतः आप सभी से अनुरोध है कि इस प्रक्रिया में जिम्मेदारीपूर्वक भाग लें।7 मई से 21 मई 2026 के मध्य स्व-गणना (Self Enumeration) निम्नलिखित 06 स्टेप में आप स्वयं ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।

subhashchand4

Bysubhashchand4

May 7, 2026
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  1. स्व-गणना पोर्टल खोलें se.census.gov.in
  2. परिवार पंजीकरण करें (नाम व मोबाइल नंबर)
  3. भाषा चुनें और OTP सत्यापन करें
  4. पता दर्ज करें और मानचित्र पर घर चिन्हित करें
  5. जनगणना प्रश्नावली भरें और अंतिम सबमिट कर SE ID प्राप्त करें।
  6. प्रगणक द्वारा SE ID की प्रविष्टि एवं क्षेत्रीय सत्यापन
    यदि आपने स्व-गणना नहीं की है, तो 22 मई से 20 जून 2026 में जनगणना प्रगणक आपके घर आकर जानकारी एकत्र करेंगे। कृपया उन्हें सही जानकारी प्रदान कर सहयोग करें।
    महत्वपूर्ण बातें
    ● जनगणना के दौरान किसी भी प्रकार की बैंक जानकारी, आधार संख्या या अन्य कोई भी दस्तावेज नहीं मांगा जाता है।
    ● आपकी दी गई जानकारी पूरी तरह गोपनीय एवं सुरक्षित रखी जाती है
    ● सही जानकारी देना प्रत्येक निवासी का राष्ट्रीय कर्तव्य है
    आइए, हम सब मिलकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी व्यक्ति जनगणना से वंचित न रहे। आपकी भागीदारी—देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव है।
    “हमारी जनगणना, हमारा विकास”

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सिर्फ चुनाव नहीं हारा था, अहंकार भी पराजित हुआ था!जुलाई 2022 में संसद के गलियारों में एक स्वर बार-बार सुनाई दे रहा था— “जवाब दो सोनिया गांधी…” “सुनो सोनिया गांधी…” “माफ़ी मांगो सोनिया गांधी…”अधीर रंजन चौधरी के एक बयान को लेकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से तीखे अंदाज़ में सवाल किए। राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।कहा जाता है कि उस घटना ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद अमेठी में राजनीतिक संघर्ष केवल चुनावी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रश्न भी बन गया।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से अपने समर्पित कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली और परिणाम सबके सामने था। स्मृति ईरानी को भारी अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।राजनीति के जानकार इस परिणाम को केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता और पद के अहंकार पर जनता के निर्णय के रूप में भी देखते हैं।सत्ता स्थायी नहीं होती। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार समय के साथ आते-जाते रहते हैं। जो स्थायी रहता है, वह है व्यक्ति का व्यवहार, उसकी विनम्रता और लोगों के प्रति उसका सम्मान।यही कारण है कि इतिहास बार-बार हमें सिखाता है—”ये सत्ता का दबदबा, ये हुकूमत, ये दौलत का नशा, किरायेदार हैं सब, घर बदलते रहते हैं।”पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। आज जो शिखर पर है, कल उसे भी जनता के बीच खड़ा होना पड़ सकता है। इसलिए शब्दों में संयम, व्यवहार में विनम्रता और विरोधियों के प्रति भी सम्मान बनाए रखना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।

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