छतरपुर जिले में वंशानुगत मछुआरों की बदहाल स्थिति: प्रकोष्ठों की सक्रियता पर उठे सवालगनेश रैकवार | छतरपुरछतरपुर जिले में वंशानुगत मछुआ समाज की स्थिति लगातार दयनीय होती जा रही है। तालाबों और जल संसाधनों पर कथित कब्जों के बीच समाज अपने हक और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन राजनीतिक दलों द्वारा बनाए गए मछुआ प्रकोष्ठों की भूमिका पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने निषाद एवं मछुआ समाज को संगठनात्मक रूप से जोड़ने के लिए प्रकोष्ठों का गठन किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी सक्रियता को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।जिले में भाजपा मछुआ प्रकोष्ठ के जिला संयोजक आशीष रैकवार तथा कांग्रेस की ओर से अरविंद रैकवार की नियुक्ति के बाद भी समाज के लोगों का आरोप है कि अब तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस बदलाव या प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।समाज के युवाओं का कहना है कि कई बार ज्ञापन, शिकायतें और आंदोलन के बावजूद न तो तालाबों पर कथित अवैध कब्जों की स्थिति में सुधार हुआ और न ही समितियों की पारदर्शी जांच आगे बढ़ पाई। इससे युवाओं में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।इधर, राजनीतिक स्तर पर मछुआ कल्याण बोर्ड अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष जैसे पदों में बदलाव के बावजूद जिला स्तर पर नेतृत्व को लेकर असंतोष बना हुआ है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इस बार योग्य और जमीनी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी मिलेगी या फिर व्यवस्था केवल सिफारिशों पर ही चलती रहेगी?इसी बीच “ऑल इंडिया फिशरमैन कांग्रेस” की सक्रियता को लेकर भी जिले में चर्चाएं तेज हैं। कई लोग इसे लगभग निष्क्रिय बताते हुए इसे “कागजी संगठन” तक सीमित मान रहे हैं।युवा रैकवार समाज का कहना है कि पिछले महीनों में दिए गए ज्ञापनों पर भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जिससे राजनीतिक दलों और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि बड़े नेताओं की चुप्पी ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।समाज का कहना है कि वर्षों से चल रही हक की लड़ाई आज भी वहीं की वहीं खड़ी है, जबकि तालाबों और समितियों में कथित अनियमितताओं और कब्जों के मामलों की जांच की मांग लगातार की जा रही है।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व इस बढ़ते असंतोष को कैसे संबोधित करता है और क्या वाकई जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव देखने को मिलेगा या नहीं।— आगे के अंक में: किस समिति में सबसे बड़े फर्जीवाड़े के आरोप, पूरी रिपोर्ट

subhashchand4

Bysubhashchand4

Apr 30, 2026
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राम मंदिर चंदा चोरी मामले में कहा जा रहा कि लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रमाशंकर मुख्य रूप से शामिल पाए गए हैं। ये सभी दान राशि गिनने और रखरखाव की ड्यूटी से जुड़े थे। सूत्र कह रहे सभी ने चोरी कुबूल कर ली है और उनकी निशानदेही पर अब तक 2.98 करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं। जांच में कुल 8 करोड़ रुपये से अधिक के हेरफेर के संकेत मिले हैं।ये तो ट्रस्ट की तरफ़ से अघोषित सूचना पत्रकारों को दिया गया है ये असली को बचाने का मामला लगता हैबड़े षड्यंत्र की आशंकापांचों आरोपी पकड़े जाने के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि इतने संवेदनशील स्थान से लगातार रकम गबन होती रही और लंबे समय तक किसी का ध्यान नहीं गया। सूत्रों का कहना है कि इस पीछे किसी बड़े व्यक्ति की शह हो सकती है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह व्यक्ति राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ा है या किसी अन्य विभाग से।

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