देश के वरिष्ठ दलित नेता, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी के प्रति असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा की गई ओछी टिप्पणी अत्यंत आपत्तिजनक और निंदनीय है, जो हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों एवं सामाजिक समरसता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
भारतीय जनता पार्टी एवं उसके नेताओं ने देश में नफ़रत का ऐसा माहौल बना दिया है कि अब संवैधानिक पदों पर बैठे भाजपा नेता भी मर्यादा और गरिमा की सीमाएं लांघते नजर आ रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष का पद लोकतंत्र में सत्ता संतुलन का एक अहम स्तंभ होता है। इस पद पर बैठे व्यक्ति के प्रति असम्मानजनक भाषा का प्रयोग संसदीय परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों के प्रति स्पष्ट अनादर को दर्शाता है।
यह न तो भारतीय लोकतंत्र की परंपरा है और न ही हमारी सामाजिक संस्कृति का हिस्सा।
खड़गे जी ने 50 वर्षों तक राजनीति में देश के विभिन्न पदों पर रहते हुए जनता, विशेषकर पिछड़े एवं वंचित वर्गों की निस्वार्थ सेवा की है।
असम के मुख्यमंत्रीको अपने शब्दों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
असम सहित पूरे देश की जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका मूंह तोड़ जवाब देगी।
सुरेन्द्र पहलवान
चेयरमैन
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी
पूर्व सैनिक विभाग
पूर्व प्रत्याशी दक्षिण दिल्ली लोकसभा 24

