बिना अहम को तोड़े आप यथार्थ से वंजित रह जाओगे, बिना क्रोध को जलाये आप आत्मिक सुख से वंजित रह जाओगे, बिना कटु वचनों का त्याग किये आप अपनत्व से वंचित रह जाओगे और बिना सहयोग दिये आप दूसरों के सहयोग प्राप्ति से भी वंचित रह जाओगे। जब तक आप स्वयं को छोड़ कर बाकी सबको बदलने का प्रयास करते रहोगे तब तक आत्मिक सुख को सदैव अपने से दूर ही पाओगे।
अहम दूसरों में दिखे तो एक बार स्वयं का निरीक्षण करने की भी आवश्यकता है। क्रोध किसी और में दिखे तो एक बार स्वयं को परखने की आवश्यकता है और कटुता दूसरों में दिखे तो एक बार स्वयं की वाणी के मूल्यांकन की भी आवश्यकता है। स्वयं के सुधार के लिए किया गया प्रत्येक प्रयास समाज सुधार की दिशा में कार्य करना ही है।
सुप्रभात🙏