लखनऊ ::- उत्तर प्रदेश में बीते कई दिनों रात के पारे में गिरावट देखने को मिल रही थी। माैसम विभाग का कहना है कि अब अगले दो हफ्तों तक रात का गिरता हुआ तापमान लगभग स्थिर और सामान्य रहेगा। दिन में गुलाबी धूप होगी और रात में हल्की ठंड बनी रहेगी। बीते दिनों हिमांचल और उत्तराखंड के पहाड़ों पर हुई बर्फबारी और ठंडी पछुआ हवाओं का असर मंगलवार को फीका पड़ा। कई जिलों में दिन व रात के तापमान में बढ़त देखने को मिली। मंगलवार को उरई में सर्वाधिक 34.6 डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज हुआ जो सामान्य से 2.6 डिग्री अधिक रहा। वहीं बाराबंकी में रात का पारा सबसे कम 15.5 डिग्री दर्ज हुआ। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश से दक्षिणी पश्चिमी मानसून की संपूर्ण वापसी हो गई है। अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के ज्यादातर जिलों में दिन व रात के पारे में 1 से 2 डिग्री की बढ़त नजर आएगी।
प्रदेश में समय से पहले सर्द होनी शुरू हुईं रातें :: 15 डिग्री पहुंचा न्यूनतम पारा
Bysubhashchand4
Oct 15, 2025Related Post
सिर्फ चुनाव नहीं हारा था, अहंकार भी पराजित हुआ था!जुलाई 2022 में संसद के गलियारों में एक स्वर बार-बार सुनाई दे रहा था— “जवाब दो सोनिया गांधी…” “सुनो सोनिया गांधी…” “माफ़ी मांगो सोनिया गांधी…”अधीर रंजन चौधरी के एक बयान को लेकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से तीखे अंदाज़ में सवाल किए। राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।कहा जाता है कि उस घटना ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद अमेठी में राजनीतिक संघर्ष केवल चुनावी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रश्न भी बन गया।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से अपने समर्पित कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली और परिणाम सबके सामने था। स्मृति ईरानी को भारी अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।राजनीति के जानकार इस परिणाम को केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता और पद के अहंकार पर जनता के निर्णय के रूप में भी देखते हैं।सत्ता स्थायी नहीं होती। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार समय के साथ आते-जाते रहते हैं। जो स्थायी रहता है, वह है व्यक्ति का व्यवहार, उसकी विनम्रता और लोगों के प्रति उसका सम्मान।यही कारण है कि इतिहास बार-बार हमें सिखाता है—”ये सत्ता का दबदबा, ये हुकूमत, ये दौलत का नशा, किरायेदार हैं सब, घर बदलते रहते हैं।”पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। आज जो शिखर पर है, कल उसे भी जनता के बीच खड़ा होना पड़ सकता है। इसलिए शब्दों में संयम, व्यवहार में विनम्रता और विरोधियों के प्रति भी सम्मान बनाए रखना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।
Jun 21, 2026
subhashchand4
