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जिलाधिकारी ने कृषि एवं उद्यान विभाग की योजनाओं की समीक्षा कर विभिन्न बिंदुओं पर दिए निर्देश

भाव स्थिरता कोष से बाजार भाव गिरने पर सहायता, निजी शीतगृह में आलू रखने पर भी मिलेगा अनुदान

बागपत, 8 सितंबर 2026। खेत में फसल तैयार होने के बाद उसे बेहतर दाम पर बागपत के आलू किसानों के लिए सरकार ने खेती से लेकर बाजार तक मदद का नया रास्ता खोला है। आलू की फसल तैयार होने के बाद किसान को बाजार भाव का लाभ दिलाने और भंडारण की सुविधा को मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं। भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना और निजी शीतगृहों में भंडारित आलू के भंडारण प्रभार पर अनुदान से किसानों को सीधे आर्थिक लाभ मिलेगा। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कृषि एवं उद्यान विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इन योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना आलू उत्पादकों के लिए बड़ी पहल है। इसके तहत निर्धारित उत्पादन लागत और आलू के बिक्री मूल्य के आधार पर पात्र किसान को नियमानुसार सहायता दी जाएगी। योजना का उद्देश्य किसान को उसकी उपज का बेहतर आर्थिक आधार उपलब्ध कराना है। योजना के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की गई है और सत्यापन के बाद सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से किसान के बैंक खाते में पहुंचेगी। आलू को शीतगृह में रखना भी अब किसान के लिए अधिक सुविधाजनक होगा। निजी शीतगृह में भंडारित आलू पर सरकार की ओर से 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान मिलेगा। एक किसान को अधिकतम 20 हजार रुपये तक सहायता दी जा सकती है। इससे किसान अपनी उपज को सुरक्षित तरीके से भंडारित कर बाजार की स्थिति के अनुसार बिक्री का निर्णय ले सकेगा।

बागपत जैसे आलू उत्पादक जिले में यह सुविधा किसानों के लिए सीधे आर्थिक लाभ से जुड़ी है। इन दोनों योजनाओं की खासियत यह है कि सहायता केवल खेत तक सीमित नहीं है। फसल तैयार होने के बाद उसके भंडारण और बाजार तक पहुंचने की पूरी कड़ी को योजनाओं से जोड़ा गया है। किसान के पास उपज को सुरक्षित रखने का विकल्प रहेगा, वहीं भाव स्थिरता कोष बाजार मूल्य से जुड़े जोखिम के समय आर्थिक सहारा देगा। इससे आलू की खेती को अधिक व्यवस्थित और लाभकारी बनाने की दिशा में मदद मिलेगी।

बैठक में कृषि एवं उद्यान विभाग की योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने किसानों को उन्नत बीज एवं पौध, आधुनिक सिंचाई, संरक्षित खेती, फल-सब्जी और फूलों की खेती तथा मधुमक्खी पालन जैसी योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया। ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों के साथ ग्रीनहाउस और पॉलीहाउस जैसी सुविधाओं को किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए, ताकि खेती में नई तकनीक का विस्तार हो। आलू किसानों के लिए विभागीय आधारीय बीज की उपलब्धता और निर्धारित छूट की सुविधा भी महत्वपूर्ण है। उन्नत बीज के प्रयोग से उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर करने के साथ किसानों को आधुनिक खेती की ओर बढ़ाने में मदद मिलेगी।

विभागीय योजनाओं के माध्यम से किसानों को फसल विविधीकरण के नए विकल्प उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए और पात्र किसानों को आवेदन की प्रक्रिया समझाकर उनका पंजीकरण कराया जाए। ऑनलाइन योजनाओं में किसानों को आवश्यक अभिलेख और आवेदन की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए, जिससे अधिक से अधिक किसान सरकारी सुविधाओं से जुड़ सकें।

ऐसे करें आवेदन : ऑनलाइन पंजीकरण से मिलेगा योजनाओं का लाभ

आलू किसानों को भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना का लाभ लेने के लिए केवल ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए विभाग ने potato.uphorticulture.in पोर्टल शुरू किया है। योजना में मंडी/एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से एपीआई से सत्यापन की व्यवस्था है। अनुदान की धनराशि आधार-सीडेड डीबीटी/आधार प्रमाणित बैंक खाते में भुगतान या अंतरण की जाएगी।

भामाशाह योजना का लाभ प्रदेश के सभी जनपदों के आलू उत्पादक किसानों के लिए है। प्रति किसान अधिकतम दो हेक्टेयर आलू रोपित क्षेत्रफल अनुमन्य है। प्रति हेक्टेयर अधिकतम उत्पादन 240 क्विंटल निर्धारित है, जबकि अनुदान के लिए प्रति हेक्टेयर अधिकतम 200 क्विंटल उत्पादन ही मान्य होगा। आलू रोपित क्षेत्रफल का निर्धारण अद्यतन खसरा-खतौनी के आधार पर किया जाएगा। एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकृत आलू उत्पादक एवं आईडी धारक कृषक ही पात्र होंगे। योजना में अनुदान की गणना आलू की उत्पादन-लागत के 25 प्रतिशत अथवा उत्पादन-लागत एवं विक्रय दर के अंतर की धनराशि, जो कम हो, उसके आधार पर की जाएगी। योजना का लाभ एफए-क्यू गुणवत्ता के 30 से 80 एमएम आकार के आलू पर देय होगा। योजना की संचालन अवधि 1 जनवरी से 15 अप्रैल तथा 1 जुलाई से 31 अक्टूबर तक निर्धारित की गई है।

आवेदन के लिए ये कागजात जरूरी: किसान को फोटोयुक्त पहचान पत्र, आधार कार्ड की छायाप्रति, बैंक पासबुक/चेकबुक की छायाप्रति और रोपित आलू क्षेत्रफल का खसरा-खतौनी तैयार रखना होगा। इसके साथ आवेदक कृषक द्वारा व्यापारी एवं आलू कृषक के बीच हुए क्रय-विक्रय का विवरण भी देना होगा। बैनर के अनुसार अभिलेख अपलोड करना अनिवार्य है और आवेदन केवल ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे।

निजी शीतगृह में आलू रखने वाले किसान भी ले सकेंगे लाभ

निजी शीतगृह में अपना आलू भंडारित करने वाले प्रदेश के सभी आलू उत्पादक किसान भंडारण प्रभार पर 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान के पात्र होंगे। इसमें अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्रफल तथा अधिकतम 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की मात्रा अनुमन्य है। इस योजना के तहत एक किसान को अधिकतम 20 हजार रुपये तक अनुदान दिया जाएगा। शीतगृह में भंडारित आलू की मात्रा का निर्धारण शीतगृह द्वारा निर्गत तकपट्टी के आधार पर होगा। वहीं आलू रोपित क्षेत्रफल का निर्धारण अद्यतन खसरा-खतौनी के आधार पर किया जाएगा। योजना का लाभ लेने के लिए किसान का आलू निजी शीतगृह में भंडारित होना चाहिए। शीतगृह से आलू की निकासी और भंडारण प्रभार के भुगतान से संबंधित प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने पर ही अनुदान के लिए पात्रता होगी।

इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी न्यायिक देवेंद्र कुमार पांडे,कृषि उप निदेशक विभाति चतुर्वेदी ,जिला उद्यान अधिकारी निधि सिंह,जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव सहित आदि उपस्थित रहे ।

सूचना विभाग बागपत

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