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मुरादाबाद

आदर्श नागरिक वह है जो अपने कर्तव्यों और अधिकारों को समझ कर अपने कर्तव्य का दृढ़ता से पालन करता है।वह जानता है कि उसे अपने अधिकारों को समुचित रूप से उपयोग किस प्रकार करना चाहिए!इन सब बातों से परिचित होने के लिए नागरिक का शिक्षित होना भी बहुत जरूरी है। शिक्षित नागरिक ही लोगों में जागृति लाने का काम कर सकता है।किसी भी देश की प्रगति का आधार वहां रहने वाला प्रत्येक नागरिक होता है। एक अकेला व्यक्ति देश को प्रगति की राह पर आगे कभी नहीं ले जा सकता देश को समृद्ध बनाने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करना ही प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होता है आदर्श नागरिक वही होता है, जो केवल अपने कल्याण की बात नहीं सोचता, बल्कि दूसरों के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्य करता है। दूसरों के हित में भी देश का हित तथा देश के हित में अपना हित छिपा होता है।आदर्श नागरिक में आपसी सहयोग,प्रेम व पर हित की भावना का होना भी अति आवश्यक होता है इसी के द्वारा वह स्वय आदर्श नागरिक कहलाता हुआ दूसरों में आदर्श की भावना का संचार करता है। आदर्श नागरिक देश के प्रति समर्पण की भावना रखता है। वह देश को उन्नति की राह पर ले जाने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देता है। समाजसेवी प्रदीप कुमार कश्यप मुरादाबाद उत्तर प्रदेश। संपर्क सूत्र – ९६९०९१६३९०

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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