Spread the love

भारत सच बोलता है।

सत्यमेव जयते, सत्य, न्याय, भारतीय संविधान, विज्ञान का आदेश है कि भारत गणराज्य में अमानवीय असमानताओं के विभेदकारी असंवैधानिक, असत्य, असम्भव, अंधविश्वासी, पाखण्डी, काल्पनिक, धर्मों, नस्लों, जातियों को मिटा दिया है जिनको सनातन धर्म के नाम पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका, मीडिया, समाचार पत्रों,T.V. चैनलों और अन्य न्यायिक संस्थाओं के लोकसेवकों द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष जीवित रखते हैं तो वे सभी न्यायिक बिबेकहीन, राष्ट्रीय चरित्रहीन और भारत गणराज्य की एकता और अखंडता तथा हम भारतीयों के मौलिक अधिकार के हनन के दोषी और संगीन अपराधीयों के गिरोह कहे जायेंगे।

जय भारत महान,
जय जय भारत का संविधान।

Ram Harsh Ram Advocate Civil Bar Association Ghazipur Uttar Pradesh India.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

— विषय: OBC एवं सभी जातियों की जाति-आधारित गिनती कराने की मांग को लेकर सांसदों को (ई-मेल) भेजा ज्ञापन.. गाजीपुर, 04 अगस्त 2026 देश में सामाजिक न्याय और समुचित विकास सुनिश्चित करने के लिए आज राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, भारत मुक्ति मोर्चा, भारत विद्यार्थी मोर्चा एवं राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा के अध्यक्षों ने अलग अलग अपने मोर्चा के माध्यम से 75 गाजीपुर लोकसभा सांसद मा. अफजाल अंसारी जी एवं उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद मा. डॉ संगीता बालवंत जी को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में मांग की गई है कि संसद के चल रहे वर्षाकालीन सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 में OBC एवं सभी जातियों की जाति-आधारित गिनती का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठाया जाए। ज्ञापन सौंपने वालों ने कहा कि “जब तक सही-सही गिनती नहीं होगी, तब तक न तो सही योजना बनेगी, न सही बजट मिलेगा और न ही सामाजिक न्याय हो पाएगा।” देश की आबादी का बड़ा हिस्सा OBC, अन्य पिछड़ा वर्ग से है, लेकिन आज भी उनके वास्तविक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। इसी कारण सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहा है। मुख्य मांगें: 1.⁠ ⁠तुरंत जाति-आधारित गणना कराकर उसके आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं 2.⁠ ⁠OBC आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जनसंख्या के अनुपात में सुनिश्चित किया जाए 3.⁠ ⁠संसद में विशेष चर्चा कराकर केंद्र सरकार से समयबद्ध कार्यक्रम घोषित कराया जाए प्रतिनिधियों ने कहा कि जाति-आधारित गिनती सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और न्याय की बुनियाद है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास की योजनाएं जमीनी स्तर तक पहुंचेंगी। दोनों सांसदों से अपेक्षा की गई कि वे संसद में इस मुद्दे को मजबूती से उठाकर पूर्वांचल और पूरे देश के अन्य पिछड़ा वर्ग की आवाज बनें। ज्ञापन देने वाले

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

×