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अंडर 14 आयु वर्ग नेशनल एथिलिट्स गौल्ड मैडलिस्ट जनपद बागपत की महिला धावकों का ट्राफी एवं मैडल देकर सम्मानित किया।
यह ऐथलीट प्रतियोगता आल इंडिया स्कूल गेम्स के तहत गोवा में आयोजित हुई थी पिछले दिनों।
जिसमें जनपद बागपत के कौताना गांव की काजल ने अंडर 14 आयु वर्ग में बागपत व प्रदेश की तरफ से 1600 व 200 मीटर में गोल्ड मेडल,तथा रोनक कोताना ने 400 मीटर में गोल्ड व अंशिका लुहारा ने 12 आयु वर्ग में 1600 मीटर व फराह लुहारा ने 13 आयु वर्ग में 1600 मीटर में गौल्ड मैडल जित कर जनपद क्षेत्र व गांव का मान पुरे भारत में बढाया, उनकी इस उपलब्धि पर उनके आज जनपद में लौटने पर बड़ौत रेलवे स्टेशन पर बड़ौत श्रमिक एसोशिएशन बागपत के अध्यक्ष प्रवीण कुमार वर्मा व कानूनी सलाहकार शिक्षक नेता जितेन्द्र तोमर ने फुलमाला भेंटकर तथा ट्राफी व मैडल भेट कर जोर दार स्वागत किया।इस दौरान विरेन्द्र शर्मा रेलवे स्टेशन दुर्गा मंदिर पुजारी अमरपाल शर्मा प्रदीप सोनपाल विनित वर्मा व कोच दिपक सरोहा कोच युसुफ मलिक थे।सभी ने महिला एथलीटों को उज्जवल भविष्य का आशीर्वाद दिया

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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