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सूत्रों के मुताबिक सोनम वांगचुक जी स्विट्जरलैंड के जेनेवा में पृथ्वी के भविष्य और जलवायु परिवर्तन पर होने वाली एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने जा रहे हैं।

इसके लिए उन्होंने 5 साल का वीजा लिया है। बताया जा रहा है कि दिल्ली स्थित स्विस एंबेसी में उनके काम और प्रोजेक्ट्स को देखकर अधिकारियों ने उन्हें विशेष सम्मान दिया और वीजा फीस तक माफ कर दी।

सोनम वांगचुक जी ने कहा कि यह सम्मान उन्हें खुशी देता है, लेकिन अपने ही देश में पिछले एक साल के दौरान उन्हें देशद्रोह के आरोप, ईडी और सीबीआई की जांच, संस्थाओं पर दबाव और 6 महीने की जेल का भी सामना करना पड़ा यह तकलीफ भी देता है।

क्या भारत अपने वैज्ञानिकों और विचारकों को सम्मान देने में पीछे रह रहा है?

अगर सोनम वांगचुक जी जैसा दिमाग देश छोड़ने को मजबूर होता है तो यह सिर्फ एक व्यक्ति का जाना नहीं बल्कि देश की बड़ी बौद्धिक क्षति होगी।

फिलहाल उनके 5 साल के वीजा ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है कि क्या वह जेनेवा शिफ्ट होने की तैयारी में हैं या यह सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय यात्रा है। वैसे सोनम वांगचुक जी का लक्ष्य मात्र भारत देश की भलाई नहीं है बल्कि उनकी दृष्टि पूरे ब्रह्मांड की जलवायु को बचाने की दिशा में सोचती है विचारती है और ठोस कदम उठाने की ओर में केंद्रित है इसलिए सोनम वांगचुक जी 5 वर्ष के लिए स्विट्जरलैंड में बसाना चाहते हैं मंदबुद्धि अंध भक्तों को छोड़कर सभी भारतीयों के लिए यह गर्व की बात होगी मेरी और सभी भारतीयों की ओर से सोनम वांगचुक जी को स्वस्थ रहने की शुभकामनाएं 🙏🌹

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