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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्राप्त सर्वोच्च ‘राज्य युवा पुरस्कार’ को अमन कुमार ने संपूर्ण युवा शक्ति के नाम किया समर्पित; कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी अस्मिता लाल को सौंपा ऐतिहासिक प्रस्ताव

केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के माय भारत विज़न और नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी के त्याग से प्रेरित होकर देश के युवाओं के लिए पेश की अनूठी नजीर

कभी साइकिल पर अखबार बांटने वाले अमन ने बदला सम्मान का व्याकरण, पुरस्कार राशि भी की युवाओं के वैचारिक उत्थान के नाम

बागपत 19 जून 2026: आधुनिक भारत के युवा इतिहास में त्याग, निस्वार्थ सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक ऐसा विरल एवं अभूतपूर्व अध्याय दर्ज हुआ है, जिसने लखनऊ से नई दिल्ली तक के नीति-निर्धारकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। अमूमन किसी भी बड़े राजकीय सम्मान को व्यक्तिगत गौरव और मेधा का प्रतीक मानकर घरों की बैठकों तक सीमित कर दिया जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के सर्वोच्च युवा सम्मान, स्वामी विवेकानंद राज्य युवा पुरस्कार से सम्मानित युवा आइकॉन अमन कुमार ने इस पारंपरिक परिपाटी को तोड़कर लोक-कल्याण और राष्ट्र-आराधन की एक ऐसी नई इबारत लिख दी है जो आने वाले दशकों तक युवाओं को दिशा दिखाएगी।

आज बागपत कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक गरिमापूर्ण एवं उच्च-स्तरीय प्रशासनिक बैठक के दौरान अमन कुमार ने अपने जीवन की इस सबसे बड़ी उपलब्धि को देश, प्रदेश और जनपद के लाखों युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने के लिए सार्वजनिक धरोहर के रूप में समाज को सौंप दिया। अमन ने बागपत की जिलाधिकारी आईएएस अस्मिता लाल के समक्ष आधिकारिक रूप से यह प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे जिलाधिकारी ने उत्तर प्रदेश शासन की मंशा के अनुरूप अत्यंत सराहते हुए सहर्ष स्वीकार कर लिया। इस ऐतिहासिक प्रस्ताव के अंतर्गत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अमन को प्रदत्त स्वामी विवेकानंद की भव्य प्रतिमा को अब किसी प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर स्थापित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि यह बागपत के इतिहास में दर्ज पहला राज्य युवा पुरस्कार है। अमन का मानना है कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत मेधा नहीं, बल्कि संपूर्ण जनपद की युवा शक्ति की अनंत संभावनाओं का प्रतीक है।

कलेक्ट्रेट में गूंजा ‘माय भारत’ का विजन: ग्राउंड ज़ीरो से राष्ट्रीय फलक तक का सफर

समारोह के दौरान, कलेक्ट्रेट सभागार में उपस्थित अधिकारियों और युवा प्रतिनिधियों के समक्ष अमन कुमार की बचपन में गांव-गांव जाकर साइकिल पर अखबार बेचने से लेकर इंटरनेशनल यूथ आइकॉन बनने तक की प्रेरक संघर्ष यात्रा का विवरण प्रस्तुत हुआ। अमन कुमार ने इस अवसर पर युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के महत्वाकांक्षी संगठन माय भारत की भूमिका और उसके दूरदर्शी विज़न को प्रस्तुत किया। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं को मंच देने के लिए माय भारत के डिप्टी डायरेक्टर अरुण तिवारी द्वारा दिए गए निरंतर सहयोग, संरक्षण एवं मार्गदर्शन के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।

अमन ने भावुक होते हुए साझा किया कि सम्मान को सार्वजनिक धरोहर बनाने का यह युगांतरकारी विचार उन्हें अपने मार्गदर्शक अरुण तिवारी जी के उसी एक सूत्र वाक्य से मिला था, जिसमें उन्होंने कहा था कि किसी भी सम्मान की वास्तविक सफलता इस बात से तय होती है कि उससे समाज में कितने नए विवेकानंद तैयार होते हैं। यह वाक्य अमन के मानस पटल पर अंकित हो गया और उन्होंने महसूस किया कि स्वामी विवेकानंद के नाम पर मिला सम्मान तभी सार्थक होगा, जब वह दूसरे युवाओं को भी समाज सेवा, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित कर सके।

नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी और केंद्रीय मंत्री के संकल्पों से मिला वैचारिक संबल

इस अनूठी पहल को धरातल पर उतारने और इसे संस्थागत रूप देने की अंतिम प्रेरणा अमन को ‘सत्यार्थी समर स्कूल’ के दौरान नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी से मिले आत्मीय मार्गदर्शन से प्राप्त हुई। अमन ने जाना कि जिस प्रकार कैलाश सत्यार्थी ने अपना वैश्विक ‘नोबेल शांति पुरस्कार पदक’ राष्ट्र को समर्पित कर दिया, जो आज राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय में सुरक्षित रहकर वैश्विक चेतना को जागृत कर रहा है; ठीक उसी प्रकार एक राज्य का सर्वोच्च पुरस्कार भी क्षेत्रीय युवाओं की तकदीर बदल सकता है।

इस संकल्प को दृढ़ता तब मिली जब अमन कुमार नई दिल्ली में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया की उपस्थिति में आयोजित माय भारत के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड समारोह के साक्षी बने, जहाँ केंद्रीय मंत्री ने उस ऐतिहासिक वैश्विक रिकॉर्ड को देश के हर एक स्वयंसेवक और युवा को समर्पित किया था। इन तीन महान वैचारिक अनुभवों ने मिलकर अमन के इस लोक-कल्याणकारी निर्णय को अंतिम स्वरूप दिया।

जिलाधिकारी ने युवाओं को पुस्तकें भेंट कर किया वैचारिक जाग्रति का आह्वान

यह आयोजन केवल प्रतीकात्मक नहीं रहा, बल्कि अमन ने अपनी पुरस्कार के साथ प्राप्त संपूर्ण प्रोत्साहन राशि का उपयोग भी युवाओं के वैचारिक उत्थान के लिए करने का प्रमाण दिया। समारोह के दौरान, अमन द्वारा इस राशि से उपलब्ध कराई गई स्वामी विवेकानंद के विचारों पर आधारित प्रेरणादायक पुस्तकों की पहली प्रति जिलाधिकारी अस्मिता लाल जी को भेंट की गई। तदुपरांत, जिलाधिकारी महोदया के कर-कमलों द्वारा सभागार में उपस्थित सभी मेधावी युवाओं और प्रशासनिक अधिकारियों को इन पुस्तकों का वितरण किया गया ताकि नई पीढ़ी को सही वैचारिक और नैतिक दिशा मिल सके।

“अवसर और सम्मान तभी मूल्यवान, जब वे राष्ट्र के काम आएं” > जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कलेक्ट्रेट सभागार में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जनपद के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि विपरीत परिस्थितियों और अभावों से निकलकर मुख्यमंत्री जी के हाथों सर्वोच्च सम्मान पाने वाला युवा आज उसे समाज के कल्याण हेतु न्योछावर कर रहा है। उत्तर प्रदेश के युवा इतिहास का यह सबसे विरला, निस्वार्थ और अनुकरणीय उदाहरण है जो आने वाले समय में संपूर्ण प्रदेश के युवाओं के लिए एक मिसाल बनेगा।

इस अवसर पर जिला सूचना अधिकारी राहुल भाटी ने अमन कुमार के इस अभिनव संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि सूचना और डिजिटल माध्यमों के इस युग में युवाओं को सही अवसरों से जोड़ना ही सच्ची राष्ट्र सेवा है। अमन कुमार ने पूर्व में भी अपनी रचनात्मक सोच से जनपद के गौरव को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थापित किया है। मुख्यमंत्री जी से प्राप्त सर्वोच्च युवा सम्मान को समाज के नाम समर्पित करने का उनका यह निर्णय बागपत के ग्रामीण अंचलों के प्रतिभावान युवाओं में सकारात्मक ऊर्जा और ‘राष्ट्र-प्रथम’ की भावना का संचार करेगा।

राष्ट्रीय पटल पर गूंजेगा निस्वार्थ सेवा का यह संदेश
तकनीक, डिजिटल सामाजिक नवाचारों और स्वयंसेवा गतिविधियों के माध्यम से देश के लाखों युवाओं को शिक्षा, छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप, नेतृत्व और करियर के अवसरों से सीधे जोड़ने वाले बागपत के ट्यौढ़ी गांव निवासी अमन कुमार आज देश के टॉप यूथ आइकॉन में शामिल होकर देशव्यापी पहचान बना चुके हैं। कभी दूसरों के घरों की दहलीज पर अखबार के माध्यम से ज्ञान का प्रकाश पहुंचाने वाला यह ग्रामीण युवा आज अपनी इस त्यागमयी और राष्ट्र-प्रथम की सोच के कारण स्वयं पूरे देश के लिए प्रेरणा का सबसे प्रखर प्रकाशपुंज बन चुका है।

इस अवसर पर भारत स्काउट एवं गाइड से अशोक बंधु भारद्वाज, उमेश शर्मा, गगन त्यागी, वंशम पँवार, नगर राजभाषा समिति बागपत के सचिव अभय नाथ मिश्र, युवाओं में वर्ल्ड पैरालम्पिक गेम्स के खिलाड़ी राहुल प्रजापति, माय भारत स्वयंसेवक सुषमा त्यागी, गुलफ़सा, नीतीश भारद्वाज, शादाब, पूजा दाहिमा, जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय से अश्वनी कुमार, परिवारजन में सत्यपाल सिंह, राकेशों देवी, अनीता देवी आदि मौजूद रहे।

सूचना विभाग, बागपत

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