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सुजाता नहीं होती तो बुद्ध नहीं होते

गया से 15 किलोमीटर दूर पर स्थित बकरौर सेनानिया गांव निरंजना नदी के किनारे पर स्थित है वहीं पर सुजाता के पिता
सेनानी सेनानिया गांव का अधिपति थे

  • माता की नाम सेनी थीं (त्रिपिटक के अनुसार)
    तथागत महामानव गौतम बुद्ध पूर्व के नाम सिद्धार्थ था गौतम बुद्ध महाराजा शुद्धोधन के पुत्र थे वे दो भाई थे छोटे का नाम देवदत्त था शुद्धोधन कपिलवस्तु के सम्राट थे लुंबनी ग्राम राजधानी थी जहां गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था शुद्धोधन कपिलवस्तु शाक्य गणराज्य के सम्राट थे शुद्धोधन का विवाह कोल साम्राज्य के राजा अंजन निषाद थे कोल गणराज्य आज का गोरखपुर के पास कुशी नगर गणराज्य हुआ करता था

तथागत महामानव गौतम बुद्ध जन्म के छठवें दिन उनकी मां की आकस्मिक निधन हो गई थी उनका लालन पालन उनकी मौसी गौतमी ने की थीं इसलिए उनका जन्म का नाम सिद्धार्थ था बाद में गौतम बुद्ध हुआ
गौतम बुद्ध विवाह यशोधरा से हुई थीं वह भी कोलिया वंश के सम्राट सुपबुध्द माता की नाम समीपा सुपबुद्ध थीं
उनके एक पुत्र राहुल था
गौतम बुद्ध 25 वर्ष की आयु में मध्य रात्री में घर छोड़ कर ईश्वर को ढूंढने निकल पड़े
एक दिन गौतम बुद्धा अपने रथ से कपिलवस्तु नगर भ्रमण करने निकले एक शिशु को देखे आगे बढ़े तो युवाओं की टोली देखे दोपहर हुआ तो एक वृद्ध को लाठी के सहारे जाते हुए देखा शाम हुआ तो कई लोग एक मृत व्यक्ति को श्मशान ले जाते हुए देखा उनके दिल पर दिन भर की घटना का बहुत गहरा असर पड़ा उन्होंने सुबह को मंदिर में पुजारी पुरोहित के पास गए उनसे पूछे की मैं कल नगर भ्रमण किया था तो मै ऐसा दृश्य देखा है ऐसा क्यों होता है पीड़ित पुरोहित ने बताया कि ये सभी ईश्वर का लीला है
बुद्ध ने उस पुरोहित से पूछे ईश्वर कहां मिलेगा? उस पुरोहित ने बताया की ईश्वर भगवान मंदिर में मिलेगा! जाओ ढूंढो

गौतम बुद्ध जी ईश्वर भगवान को ढूंढने अपने राज पाट कुल परिवार सभी को छोड़ कर एक दिन घर से निकल लिए
सभी मंदिर मंदिर ढूंढ़ते रहे लेकिन उन्हें कहीं भी ईश्वर नहीं मिला?
कई दिनों के बाद फिर आज पुरोहित से पूछे भाई मैं तो पृथ्वी के सभी मंदिरों में ईश्वर को ढूंढ लिए लेकिनआज तक मैं 50 वर्षों से ईश्वर को ढूंढ रहा हूं मुझे नहीं मिला क्यों?
पुरोहित ने पूछा क्यों ढूंढ रहे हों गौतम बुद्धा ने बताए की मनुष्य जन्म लेता है जवान होता हैं उसके बाद वृद्ध क्यों हो जाता हैं बीमार क्यों होता है उसके बाद मृत्यु क्यों होता है?ईश्वर से सवाल करूंगा?*
पुरोहित ने समझ गया की यह अद्भुत मानव हैं इसे ऐसी जगह बताउ जहां जानवर खा जाए
पुरोहित ने गौतम बुद्ध को बोला ईश्वर भगवान ऐसे नहीं मिलते हैं
ईश्वर उसी को दर्शन देते हैं जो बया वान जंगल में जाकर सच्चे और पवित्र मन से कई दिनों तक तपस्या करते है उसके बाद ईश्वर प्रशन होंगे उसके बाद में दर्शन देंगे तो अपनी सवाल करना तो जवाब मिल जाएगा
बुद्ध ने चिंतन किया की मैने तो ऐसी साधना तपस्या तो किया ही नहीं इसलिए अभी तक ईश्वर भगवान का दर्शन नहीं हुआ है?
चलो तपस्या पर बैठा जाए
पुरोहित खुश हो गया चलो पिंड छुटा ये जंगल में जाएगा तपस्या पर बैठेगा रात्री में जंगली जानवर आयेगा और इस पागल को खा जाएगा बहुत चला था ईश्वर भगवान को ढूंढने?

बुद्ध चला तपस्या करने

तथागत महामानव गौतम बुद्धा चलते चलते बोध गया पहुंच गए घने जंगल में एक पीपल के वृक्ष के नीचे बैठ गए भूखे प्यासे ईश्वर भगवान को प्राप्त करने के लिए उस वृक्ष के नीचे 27 दिनों तक किसी तरह बैठे रहे पतझड़ का दिन था उनकी आंखे बन्द हो गई मूर्छित हो कर गीर गए उनके ऊपर वृक्ष के पत्ते गिरते चले गए संपूर्ण शरीर ढक गए शाम की वक्त थी ठंड की महीना थी सुजाता उसी जंगल में सुयोग से जलाऊ लेने के लिए गई थी पत्तो की ढेर देख कर अपनी साड़ी के आचल में ज्यों ही पत्तो को उठाती हुई नीचे उंगली गई तो किसी मानव की शरीर की स्पर्श हुई पत्तो को हटाई तो देखी एक मूर्छित जीर्ण शीर्ण आदमी पड़ा था उसने अपनी मिट्टी के वर्तन में पंजीरी ले कर गई थी साथ में जल पानी भी थीं उसके मुंह में पानी डाली तो कुछ भी हलचल नहीं हुई उसने उसे अपनी मुंह से उसके मुंह में स्पंदन की तो थोड़ी थोड़ी नारी चलती हुई अनुभव हुई सुजाता भीलनी ने उसके मुंह में अपनी मुंह से हवा स्पंदन घंटों करती रहीं उसके बाद पंजीरी खीर को उसके मुंह खोल कर डाली और पानी डाली कई दिनों से पाचनतंत्र ठप पड़ने के बाद अंदर में पंजीरी पानी गई पाचनतंत्र चलने लगा घंटों बाद आंख खुल गई उसे उठा कर अपनीगांव सुननीया बकरौर ले कर आई उनकी सेवा उपचार की उसके बाद जब होश आया तो सुजाता ने पूछी यहां इस बया वान जंगल में क्यों आए थे*

तथागत महामानव गौतम बुद्धा ने सुजाता भीलनी से बोले मैं ईश्वर को ढूंढने निकला था इसलिए इस जंगल में तपस्या करने के लिए आया था

सुजाता भीलनी ने गौतम को बोली बुद्धि नहीं है मूर्ख हो क्या?
किसने बोला है आपको की घने जंगलों में ईश्वर भगवान मिलते हैं!
गौतम ने बताया की पुरोहितों ने मुझसे बताया है की ईश्वर घने जंगलों में तपस्या करने से मिलेगा?
सुजाता ने बोली की पुरोहितों ने आपको हत्या करवाने के लिए घने जंगलों में तपस्या करने के लिए बोला था इसलिए की घने जंगलों में जंगली जानवर आपको शिकार बना ले
इस पृथ्वी पर ईश्वर कही भी नहीं है
प्राकृतिक ही ईश्वर है मानवता ही ईश्वर है बुद्धि नहीं है क्या?
गौतम गंभीर हो कर रात भर चिंतन करने लगे अंत में सुजाता भीलनी ज्ञान का संदेश से मनन किए सुबह गौतम ने सुजाता को गुरु मान कर उसके चरण स्पर्श किए और बोले अगर मुझे जान नहीं बचाई होती तो आज दिव्य ज्ञान की प्राप्ति नहीं होती तुम ही मेरी जीवन दात्री हो ज्ञान दात्री हो
गौतम को बुद्धि की प्राप्ति हुआ

उसी दिन से गौतम को गौतम बुद्धा नाम पड़ा है
गौतम बुद्ध ने सबसे पहला उपदेश प्रयोग खुद कर के बोले थे
अत दीपो भवह खुद दीपक बनो
तथागत महामानव गौतम बुद्ध का विचार आज सर्वज्ञ हैं सम्पूर्ण विश्व आज बुद्ध के विचारों पर चल कर विकास कर रहा है जिसने बुद्ध विचार को अपनाया है वह सबसे आगे है बुद्ध ही विज्ञान है बुद्ध को बुद्ध बनाने वाली सुजाता मां अमर है जब जब बुद्ध को उनके अनुयाई नाम लेंगे तब तब सुजाता मां को जरूर याद करेंगे

विश्व विजेता सम्राट अशोक जब कलिंग विजय के बाद हथियार त्यागे थे तो सबसे पहले बकरौर गांव बोध गया से 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित है वहां गए थे और सुजाता मां की याद में सुजाता स्तूप 50 फूट ऊंचा 150 फूट ब्यास में बनवाए थे जो आज भी जीता जागता सबूत हैं

विश्व में संदेश है

युद्ध नहीं बुद्ध चाहिए
बुद्ध शांति का विकाश विज्ञान का प्रतीक हैं

जय निषाद राज जय तथागत बुद्ध जय सुजाता मां जय सम्राट अशोक जय धन्य भारत की धरती है साहब आनन्द निषाद जी का विचारधारा का लेख प्राक विश्व इतिहास के सौजन्य से जय निषाद राज

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