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भारत की सोच, दुनिया तक: यूपी के युवा ने ब्रिक्स युवा सम्मेलन में रखी पर्यावरण की बात

गांव से ग्लोबल मंच तक: बागपत के युवा अमन ने बढ़ाया भारत का मान

29 अप्रैल 2026 | लखनऊ / नई दिल्ली

जब बागपत के एक युवा की सोच वैश्विक मंच पर गूंजती है, तो यह सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का गर्व बन जाती है। जिस जमीन पर साधारण जीवन के बीच सपने पनपते हैं, वहीं से निकलकर माय भारत स्वयंसेवक अमन कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आवाज बुलंद की। उन्होंने ब्रिक्स युवा सम्मेलन में “पर्यावरण के लिए स्वयंसेवा” का ऐसा संदेश दिया, जिसने यह साबित किया कि बदलाव की असली ताकत जमीनी स्तर से ही आती है।

वर्ष 2026 भारत के लिए वैश्विक नेतृत्व का वर्ष बनकर सामने आया है। दुनिया के प्रमुख विकासशील देशों के समूह ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत को मिली है और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी भारत कर रहा है। ऐसे समय में भारत ने केवल कूटनीति ही नहीं, बल्कि युवाओं की ताकत को भी दुनिया के सामने रखा है। इसी सोच के तहत युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार ने ब्रिक्स यूथ ट्रैक के अंतर्गत “सर्व ब्रिक्स: एक बेहतर कल के लिए स्वयंसेवा” विषय पर यह महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया।

इस वैश्विक मंच पर 11 देशों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथोपिया, ईरान और इंडोनेशिया सहित अन्य देशों के युवा प्रतिनिधि और अधिकारी जुड़े। सभी देशों ने अपने-अपने यहां स्वयंसेवा के जरिए हो रहे बदलाव के मॉडल साझा किए। कहीं तकनीक के जरिए समाज बदला जा रहा है, तो कहीं आपदा प्रबंधन में युवाओं की भूमिका मजबूत हो रही है। इस संवाद ने यह स्पष्ट किया कि दुनिया की चुनौतियां अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन समाधान में युवाओं की भूमिका हर जगह समान रूप से अहम है।

इसी मंच पर जब उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद के छोटे से गांव ट्यौढी निवासी अमन कुमार ने अपनी बात रखी, तो उसमें केवल विचार नहीं, बल्कि अनुभव और जमीन से जुड़ा सच भी था। उनका चयन भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा देशभर से केवल दो युवाओं में किया गया। यह चयन बताता है कि अब भारत का युवा, चाहे वह गांव से ही क्यों न आता हो, अपनी मेहनत और सोच के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच रहा है।

अपने संबोधन में अमन कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से जुड़े पर्यावरण अभियानों को मजबूती से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भारत में मिशन लाइफ, “एक पेड़ मां के नाम”, कैच द रेन और स्वच्छ भारत जैसे अभियान केवल सरकारी योजनाएं नहीं, बल्कि जनभागीदारी से चलने वाले आंदोलन बन चुके हैं। इन अभियानों के जरिए लोगों की सोच में बदलाव आ रहा है और हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझने लगा है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज का युवा केवल समस्याओं पर चर्चा नहीं करता, बल्कि उनके समाधान का हिस्सा बनता है। देश में माय भारत पोर्टल और माय गवर्नमेंट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म युवाओं को सीधे राष्ट्र निर्माण से जोड़ रहे हैं। इन माध्यमों के जरिए युवा अपनी ऊर्जा और समय को सकारात्मक दिशा में लगाकर समाज में बदलाव ला रहे हैं।

अमन कुमार ने अपने गांव, जनपद और उत्तर प्रदेश में किए गए कार्यों का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ा असर डालते हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि जल संरक्षण, वृक्षारोपण और जागरूकता अभियान जैसे कदम धीरे-धीरे लोगों की सोच बदलते हैं और समाज को नई दिशा देते हैं। उनका अनुभव इस बात का प्रमाण है कि बदलाव की शुरुआत बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि छोटे संकल्पों से होती है। उनकी इसी सोच और कार्यों को पहचान देते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें राज्य के सर्वोच्च युवा सम्मान स्वामी विवेकानंद युवा पुरस्कार से सम्मानित किया है।

इस सम्मेलन में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की सचिव डॉ पल्लवी जैन गोविल, अपर सचिव नितेश कुमार मिश्रा, माय भारत के डायरेक्टर सलिल कुमार, डिप्टी डायरेक्टर अभय शंकर सहित विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

अब भारत का युवा केवल अपने भविष्य के बारे में नहीं सोच रहा, बल्कि वह समाज और दुनिया के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए भी आगे आ रहा है। जब दुनिया जलवायु परिवर्तन और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रही है, तब भारत का युवा “स्वयंसेवा” को समाधान के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

सूचना विभाग बागपत

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