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केवल एक फायदा बता दो हिन्दुत्व पर गर्व करने से 85% वाले शूद्र समाज को मिला हो या मिलने की संभावना हो ?
हिन्दू धर्म तुम्हारे द्वार पर बँधी उस गाय की तरह है जिसका मालिक ब्राह्मण है तुम उसके चारा पानी का प्रबंध करते हो, उसकी सेवा, सुरक्षा, स्वास्थ्य की जिम्मेदारी उठाते हो, लेकिन उसका पूरा दूध ब्राह्मण के घर चला जाता है, तुम्हारे हिस्से में आता है गोमूत्र और गोबर ।
फिर भी तुम्हें गुस्सा नहीं आता और उसी अन्याय पूर्ण व्यवस्था का गुणगान करते हो, आनन्दित होते हो उसी पर गर्व करते हो। तो करो लेकिन यह तो बताना ही पड़ेगा कि आज तक इससे शूद्र समाज को क्या मिला और भविष्य में क्या मिलने वाला है।
यदि एक वाक्य में इसका उत्तर कुछ है तो यही है कि आज तक हिन्दुत्व पर गर्व करने से शूद्रों को ब्राह्मणों की मानसिक गुलामी, श्रद्धा, अंधश्रद्धा, नीच ऊँच का भेदभाव छुआछूत और सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक हर प्रकार का शोषण मिला है एवं ऐसे ही गर्व करते रहे तो भविष्य में भी यही मिलते रहेगा।
इसीलिए भारतीय शूद्र संघ कहता है “गर्व से कहो हम शूद्र हैं
यहाँ सवाल करते हो कि वर्ण व्यवस्था में शूद्र सबसे नीच वर्ण माना गया है उसपर गर्व कैसे करें ?
भाई मेरे आज आपको कोई नीच कहे तो क्या खुद को नीच मान लोगे? नहीं न, तो हजारों साल पहले जिन परजीवी ब्राह्मणों ने हमारे पूर्वजों को शूद्र कहा, शिक्षा, शस्त्र, संपत्ति के अधिकार से वंचित किया, पशुतुल्य जीवन जीने को विवश किया, हम उनकी बात आज क्यों मानें हमारे पूर्वज भी मेहनत कश थे, खेती बारी पशुपालन, भवन निर्माण से लेकर मानव जीवन के लिए उपयोगी हर वस्तु का निर्माण करते थे, निठल्ले दूसरे की कमाई पर जीने वालों ने (जो वास्तव में खुद नीच परजीवी थे) यहाँ के मूलनिवासियों को शूद्र वर्ण में रखकर हीन भावना भरने का कुत्सित प्रयास किया और उसी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सैकड़ों ग्रंथ लिखकर उन्हें धर्म ग्रंथ के रूप में प्रतिष्ठित कर दिया, जबकि ये सिर्फ और सिर्फ ब्राह्मण वादी, अमानवीय, विषमतावादी व्यवस्था को बनाये रखने के उपकरण हैं साधन हैं, ब्राह्मण हितकारी दस्तावेज हैं। और सभी ग्रंथों में शूद्रों को नीच अधिकार विहीन ही लिखा गया है, हम शिक्षित होकर भी उनकी हजारों साल पहले रची साजिश जो आज तक परिवर्तित रूपों के साथ जारी है और हिन्दुत्व पर गर्व भी उनमें से एक है को चुपचाप मान लें तो महापुरुषों के संघर्ष के बदौलत मिली शिक्षा का क्या फायदा ?
शूद्र शब्द परिश्रम, उत्पादन, निर्माण, दाता और मूलनिवासी होने का द्योतक है इसलिए हमें शूद्र होने पर गर्व है।
आप कहेंगे मूलनिवासी, बहुजन शब्द मौजूद हैं तो बी.एस.एस. शूद्र शब्द पर ही क्यों जोर देता है ?
ब्राह्मणों ने जब देखा कि शूद्र भी पढ़ लिख रहे हैं और जब ग्रंथों को पढ़ेंगे तो विद्रोह न कर दें, इसलिए हिन्दू नाम का संगठन हिन्दू महसभा, आर.एस.एस., विहिप आदि बनाकर बड़े शातिराना तरीके से सभी शूद्रों को हिन्दू बनाया और विभिन्न जातियों जैसे अहिर, गड़ेरिया, कुर्मी, कोइरी, यादव, पाल, वर्मा, मौर्य जैसे अपेक्षाकृत सम्मानजनक नाम देकर प्रमोशन कर दिया ताकि वे शूद्र शब्द को भूलकर खुद को हिन्दू समझें (हालांकि कि हम तो उन्हें शूद्र ही समझेंगे) इस तरह लोकतंत्र होने के बावजूद उनके वोटों पर हमारा ही अधिकार होगा और सत्ता ब्राह्मणों के ही हाथ में रहेगी ।
बी.एस.एस. ने शूद्र शब्द से ब्राह्मणों के मन में बैठे डर को अपना हथियार बनाया है ।
एससी, एसटी, ओबीसी व धर्म परिवर्तित अल्पसंख्यक जब खुद को शूद्र समझकर इनके लिखे कथित धर्म ग्रंथों को पढ़ेगा, अपने पूर्वजों जिन्हें राक्षस, दैत्य, दानव, असुर कहकर उन पर जो अन्याय अत्याचार किया है पूरे शूद्र समाज का जो शोषण उत्पीड़न किया है वे सब कहानियां पढ़कर उन्हें महसूस होगा कि हमारे पूर्वजों पर इन्होंने कितना अत्याचार किया है, तब वह उन महापुरुषों के बारे में भी जानने की कोशिश करेगा जिन्होंने आजीवन ब्राह्मण वादी विषमतावाद के खिलाफ डटकर संघर्ष किया और समतवाद व मानवता वाद की अलख जगाया।
जिसकी गौतम बुद्ध से लेकर सन्त कबीर, सन्त रैदास, नारायणा गुरू, ज्योतिबा फुले, साहू महाराज, बाबा साहेब डा. अम्बेडकर, रामास्वामी पेरियार, मा. कांशी राम, पेरियार ललई सिंह यादव, बिरसा मुंडा, जगदेव प्रसाद कुशवाहा आदि की लंबी श्रृंखला है ।
जब शूद्र समाज के लोग ब्राह्मण वादी विषमतावादी षडयंत्र और उसके समानांतर चल रहे अपने महापुरुषों के समतावादी आंदोलन को समझ जायेंगे तो अपने मित्र और शत्रु की पहचान करने में सक्षम हो जायेंगे और एकबार पूरा शूद्र समाज एक जुट होकर महापुरुषों के आंदोलन से जुड़ गया फिर मनुवादियों के सारे के सारे षडयंत्र धरे के धरे रह जायेंगे।
आज तक इन्होंने सारे आंदोलन को घुसपैठ करके तहस नहस किया किन्तु शूद्र शब्द हमारा वह सुरक्षा कवच है जो उन्हें घुसपैठ करने का अवसर ही नहीं देगा ।
हिन्दुत्व पर गर्व करके ब्राह्मणों की गुलामी करने से बेहतर है।
गर्व से कहो हम शूद्र हैं, और अपने देश के शासक बनो ।
ब्राह्मण वाद से नाता तोड़ो, अपने महापुरुषों से नाता जोड़ो ।
श्रद्धा, अंधश्रद्धा से नाता तोड़ो, वैज्ञानिकता से नाता जोड़ो ।
विषमतावाद हो बरबाद, समता वाद जिन्दा बाद ।
अंधश्रद्धा वाद हो बर्बाद! वैज्ञानिकता वाद जिन्दाबाद!
भेद-भाव वाद हो बर्बाद! मानवता वाद जिन्दाबाद!
पूरे भारत के शूद्रों एक हो और
गर्व से कहो हम शूद्र हैं ।
चन्द्र भान पाल (बी.एस.एस.)

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