इसरो ने फैसला किया है कि रॉकेट बनाने का काम अब प्राइवेट सेक्टर करेगा.
ऐसा फैसला क्यों करना पड़ा और किसके लिए? कहीं स्टार्टअप को काम देने के लिए इसरो अपना काम तो नहीं बंद कर रहा?
जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि इसरो के रॉकेट बनाने के संसाधनों को प्राइवेट कंपनियों को बेचा जा रहा है. 100 से अधिक इसरो के वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दे दिया.
इसरो जो भारत की कामयाबी का एक बड़ा चेहरा है, उसकी जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्टार्टअप के साथ बैठक करते हैं और देश का स्पेस सेक्टर ‘निजीकरण’ की तरफ धकेला जा रहा है 😠
एक रिकॉर्ड और देखिए – 1993 से 2026 के दौरान इसरो ने पीएसएलवी के तहत 64 मिशन लाँच किए, लेकिन जनवरी 25 से जनवरी 26 के बीच इसरो के तीन-तीन मिशन फेल हो गए. फेल होने की रफ्तार क्यों बढ़ती जा रही है?
सरकार को बताना चाहिए कि 2 लाख से अधिक स्टार्टअप में कितने युवाओं को नौकरी मिली है? किस सैलरी की नौकरी मिली है?
#ज़िम्मेदार_कौन?