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बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह ने कहा, “भारत की तरह सभी धर्मों को मानने वाले देश बहुत कम हैं। भारत कभी भी खुद को हिंदू राज्य घोषित नहीं करता। वास्तव में, ‘हिंदू’ शब्द तो अन्य विदेशियों द्वारा इस देश के लिए इस्तेमाल किया गया है, उन लोगों के लिए जो सिंधु नदी के उस पार रहते हैं। इसलिए, मेरी समझ से, ‘हिंदू क्या हैं’ यह सवाल अर्थहीन है। हो सकता है कुछ लोग मुझसे असहमत हों, लेकिन ‘हिंदू’ शब्द का कोई विशेष अर्थ नहीं है। ‘हिंदू’ का सीधा सा मतलब है वे लोग जो सिंधु नदी के उस पार रहते हैं।”

संविधान केवल कानूनी दस्तावेज नहीं- जस्टिस सिंह

जस्टिस सिंह नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी स्टूडेंट बार एसोसिएशन लॉ कॉन्क्लेव 2026 में बोल रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने कहा, “हमारे सामने संविधान है, जो सबसे रचनात्मक कानूनी दस्तावेज है। यह केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है। यह एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। यह एक सामाजिक दस्तावेज है। यह एक रचनात्मक दस्तावेज है।”

मुझे पश्चिमी शिक्षा से कोई भी आपत्ति नहीं- एन कोटिश्वर सिंह

अपने संबोधन के दौरान जस्टिस सिंह ने आधुनिक संस्थानों को आकार देने में पश्चिमी प्रभाव की भूमिका को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, “मुझे पश्चिमी शिक्षा से कोई आपत्ति नहीं है। मैं खुद उसी की उपज हूं। लेकिन अब समय आ गया है कि हम उससे आगे देखें, क्योंकि पश्चिमी कानूनी शिक्षा प्रणाली शायद भारत की सभी समकालीन स्थितियों से निपटने में सक्षम नहीं है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अदालतों में क्षेत्रीय भाषाओं के इस्तेमाल को बढ़ाने से न्याय तक पहुंच और व्यवस्था में जनता का भरोसा काफी हद तक बेहतर हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार ने वकीलों से किया सवाल

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार ने शनिवार को युवा वकीलों से अनुशासन और लंबे समय तक काम करने की संस्कृति अपनाने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने युवा वकीलों में अपने करियर की शुरुआत में ही वीकेंड पर छुट्टी लेने की बढ़ती प्रवृत्ति के प्रति आगाह भी किया।

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