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पंचायत घरों पर उमड़ रहे किसान, गांव-गांव चल रहा फार्मर रजिस्ट्री अभियान

बागपत, 15 मार्च 2026। किसानों को सरकारी योजनाओं से सीधे जोड़ने और खेती को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में जिले में चल रहा फार्मर रजिस्ट्री अभियान अब गांव-गांव रफ्तार पकड़ रहा है। इसी क्रम में जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बड़ौत तहसील के बिजरौल गांव स्थित पंचायत घर पहुंचकर चल रहे फार्मर रजिस्ट्री पंजीकरण कार्य का औचक निरीक्षण किया और अभियान की प्रगति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद किसानों से बातचीत कर फीडबैक लिया और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले के हर पात्र किसान का पंजीकरण समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री किसानों को सरकारी योजनाओं से सीधे जोड़ने और कृषि व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा कि पंचायत स्तर पर चल रहे इस अभियान में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और गांव-गांव तक इसकी जानकारी पहुंचाई जाए ताकि कोई भी पात्र किसान इससे वंचित न रह जाए।

जिले में फार्मर रजिस्ट्री के लिए पंचायत घरों और जन सेवा केंद्रों को मुख्य पंजीकरण केंद्र बनाया गया है। यहां किसान अपने आवश्यक दस्तावेज लेकर पहुंच रहे हैं और अपना पंजीकरण करा रहे हैं। प्रशासन की ओर से गांवों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि किसानों को दूर जाने की आवश्यकता न पड़े और वे अपने गांव में ही आसानी से पंजीकरण करा सकें। इस अभियान का उद्देश्य जिले के प्रत्येक किसान को फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ना है।

फार्मर रजिस्ट्री दरअसल किसानों की डिजिटल पहचान बनाने की प्रक्रिया है। इस प्रणाली में किसान की पहचान, उसकी खेती की जमीन, फसल से संबंधित जानकारी और बैंक खाते का विवरण सरकारी डिजिटल पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। इसके बाद किसान को एक यूनिक किसान पहचान संख्या यानी फार्मर आईडी दी जाती है। भविष्य में यही किसान की पहचान के रूप में काम करेगी और विभिन्न सरकारी योजनाओं में इसका उपयोग किया जाएगा। फार्मर रजिस्ट्री दरअसल केंद्र सरकार की एग्रीस्टैक पहल का अहम हिस्सा है। एग्रीस्टैक का उद्देश्य कृषि क्षेत्र के लिए एक डिजिटल ढांचा तैयार करना है, जिसमें किसानों का डेटा, भूमि रिकॉर्ड और फसल से जुड़ी जानकारी एकीकृत रूप से उपलब्ध हो सके। इसके आधार पर किसानों को डिजिटल कृषि सेवाएं प्रदान करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे खेती को आधुनिक और अधिक व्यवस्थित बनाया जा सके।

फार्मर रजिस्ट्री बनने के बाद किसानों को कई प्रकार के फायदे मिलने की उम्मीद है। सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि किसानों को मिलने वाली सरकारी सहायता और योजनाओं का पैसा सीधे उनके बैंक खाते में पहुंच सकेगा। इसके अलावा किसानों को अलग-अलग योजनाओं के लिए बार-बार दस्तावेज जमा करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी, क्योंकि उनका पूरा रिकॉर्ड पहले से डिजिटल प्रणाली में उपलब्ध रहेगा। इसके साथ ही फसल बीमा, कृषि उपकरणों पर सब्सिडी और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ भी किसानों को अधिक पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी और वास्तविक किसानों तक लाभ पहुंचाने में आसानी होगी।

प्राकृतिक आपदाओं के समय भी फार्मर रजिस्ट्री प्रणाली काफी उपयोगी साबित हो सकती है। अक्सर ओलावृष्टि, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक कारणों से फसल खराब होने पर मुआवजा वितरण में समय लग जाता है। लेकिन यदि किसानों और उनकी जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होगा तो नुकसान का आकलन और राहत वितरण की प्रक्रिया काफी तेजी से पूरी की जा सकेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बागपत जिला कृषि के लिए जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में किसान गन्ना, गेहूं और सब्जियों की खेती करते हैं। ऐसे में फार्मर रजिस्ट्री बनने से जिले के किसानों को सरकारी योजनाओं और कृषि सुविधाओं से जोड़ने में काफी मदद मिल सकती है।

फार्मर रजिस्ट्री के लिए किसानों को कुछ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं। इनमें मुख्य रूप से आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक पासबुक और जमीन का खसरा-खतौनी विवरण शामिल है। इन दस्तावेजों के आधार पर किसान की जानकारी डिजिटल पोर्टल पर दर्ज की जाती है और सत्यापन के बाद उसे किसान पहचान संख्या जारी की जाती है।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने किसानों से अपील की कि वे फार्मर रजिस्ट्री के लिए आगे आएं और समय रहते अपना पंजीकरण कराएं। उन्होंने कहा कि यह पहल किसानों को सरकारी योजनाओं से सीधे जोड़ने के साथ-साथ कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस दौरान एसडीएम बड़ौत भावना सिंह भी मौजूद रहीं।

सूचना विभाग बागपत

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