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गाजियाबाद समाजवादी नेता नसीम खान ने बिहार की राजनीति में चल रहे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ महीने पहले एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक मुस्लिम छात्रा का हिजाब मंच पर खींचने की घटना से देशभर के मुसलमानों में गहरा आक्रोश पैदा हुआ था। उन्होंने कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री से ऐसी हरकत की अपेक्षा नहीं की जा सकती थी, विशेषकर तब जब मामला महिलाओं की गरिमा और धार्मिक आस्था से जुड़ा हो।
नसीम खान ने कहा कि हिजाब केवल कपड़े का एक टुकड़ा नहीं है बल्कि मुस्लिम महिलाओं की धार्मिक मान्यता, परंपरा और व्यक्तिगत आस्था का हिस्सा है। भारत का संविधान हर नागरिक को यह अधिकार देता है कि वह अपनी आस्था और पसंद के अनुसार कपड़े पहन सके। ऐसे में किसी भी सार्वजनिक मंच पर किसी महिला के हिजाब को खींचना न केवल उसकी गरिमा के खिलाफ है बल्कि संविधान द्वारा दिए गए व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के भी विपरीत है।

उन्होंने कहा कि उस समय मुस्लिम समाज में इस घटना को लेकर काफी रोष था और लोगों ने इसे महिलाओं के सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता पर चोट माना था। आज जब राजनीतिक घटनाक्रम के चलते नीतीश कुमार की मुख्यमंत्री की कुर्सी छिनती हुई दिखाई दे रही है और राज्यसभा नामांकन के बाद यह स्थिति बन गई है कि वह मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहेंगे, तो इसे हमारे मुस्लिम समाज में उसी घटना से जोड़कर देख रहे हैं।
नसीम खान ने अपने बयान में कहा कि “जिस तरह उस दिन मंच पर एक बेटी का हिजाब खींचा गया था, आज उसी तरह सत्ता की कुर्सी भी उनसे खिसकती हुई नजर आ रही है।मुस्लिम समाज इसे इसे ईश्वर का न्याय मान रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि राजनीति में पद और सत्ता अस्थायी होती है, लेकिन किसी की आस्था और सम्मान के साथ खिलवाड़ करना कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता। नेताओं को हमेशा अपने पद की गरिमा, संविधान की मर्यादा और समाज की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

नसीम खान ने अंत में कहा कि देश में आपसी सम्मान, धार्मिक स्वतंत्रता और महिलाओं की गरिमा की रक्षा ही लोकतंत्र की असली ताकत है, और किसी भी नेता को इन मूल्यों से ऊपर नहीं समझना चाहिए।

(नसीम खान)
नेता समाजवादी पार्टी , गाजियाबाद

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