पश्चिम प्रदेश निर्माण मोर्चा के पूर्व सैनिक एवं कार्यकारी समिति होली मिलन कार्यक्रम एक शानदार आयोजन।मातारानी महल पतवाड़ी में संस्थापक सदस्य टीकम यादव के सहयोग से किया गया। आज कार्यक्रम में सदस्यों द्वारासांसदों को दिए गए ज्ञापनों का और प्रभावशाली रूप से, संसद में इस मांग को उठाने के लिए दबाव बनाने का समर्थन किया गया। युवाओं एवं महिला शक्ति को इन कार्यक्रम में बढ़चढ़कर भाग लेने के लिए विशेष रूप से प्रेरित करने की जिम्मेदारी तय की गई। आने वाले चुनाव में इस मुद्दे के राजनीतिक पहलुओं पर भी विचार किया गया।कार्यक्रम में मुख्य रूप सेश्री ओमवीर सिंह बीरवाल केन्द्रीय संगठन मंत्री, कर्नल सुधीर चौधरी ,केन्द्रीय महासचिव, कर्नल रणसिंह डूडी, अध्यक्ष।सुपर पावर पार्टी ऑफ इंडिया.मेजर डॉ॰ हिमांशु, समन्वयक, सहयोगी संगठन विजय चौधरी केंद्रीय सचिव सैनिक प्रभाग, प्रोफेसर कुलदीप मलिक,के के राणा, उधम सिंह, मोहन जाट, नीरज पवार चौधरी श्यामसिंह एवं अन्य गणमान्य सदस्यों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। रंग और गुलाल से होली खेलने के बाद सभी को आने वाले समय में पश्चिम प्रदेश राज्य निर्माण के लिए पूर्ण समर्पण के साथ सहयोग करने के लिए और अन्य साथियों को जोड़ने के लिए संकल्प लिया गया।

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Bysubhashchand4

Feb 23, 2026
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केंद्रीय महासचिव.

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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