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जनपद मैनपुरी में स्वतंत्र पत्रकारिता पर उठे सवालों के बीच,
अहिल्याबाई होल्कर किसान सेवा संगठन के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव शत्रुघ्न पाल एवं गौरव कश्यप (बजरंग दल सहसंयोजक, मैनपुरी) के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है।

🗓 दिनांक: 19 फरवरी 2025
⏰ समय: प्रातः 11:00 बजे
📍 स्थान: जिला कलेक्ट्रेट, मैनपुरी

हिंद न्यूज़ 24×7 के संपादक अतुल कश्यप पर कुर्रा थाने जनपद मैंनपुरी में दर्ज अन्यायपूर्ण मुकदमे के विरोध में जिलाधिकारी महोदय को अलग-अलग ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

यह सिर्फ एक पत्रकार का मामला नहीं है,
यह सच, न्याय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की लड़ाई है।

जब भी किसी सच्ची आवाज़ को दबाने की कोशिश होती है, तब समाज के हर जागरूक नागरिक का कर्तव्य बनता है कि वह आगे आए।

आप सभी सर्व समाज के प्रतिनिधि, समाजसेवी, आम जनमानस, विधि सलाहकार एवं संगठन प्रमुखों से विनम्र निवेदन है कि अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराकर न्याय की इस लड़ाई को मजबूती प्रदान करें।

आइए, एकजुट होकर यह संदेश दें —
“कलम की ताकत को झुकाया नहीं जा सकता!”

🙏 आपकी उपस्थिति सादर प्रार्थनीय है।

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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