Spread the love

सीएम योगी की दृढ़ इच्छाशक्ति से बालिकाओं को मिल रहा यूनिवर्स की मिस्ट्री जानने का आधुनिक अवसर

बागपत के गांव तक मुख्यमंत्री योगी ने पहुंचाई हाईटेक एस्ट्रोनॉमी लैब, 45 प्रकार के प्रयोग कर अंतरिक्ष की बारीकियां सीख रहे बच्चे

अब टेलिस्कोप चलाने से लेकर नाइट-स्काई ऑब्जर्वेशन तक कर रही लड़कियां

कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय छपरौली में तैयार खगोल शास्त्र लैब में 100 छात्राएं सीख रही हैं एस्ट्रोनॉमी सॉफ्टवेयर का उपयोग करना

बागपत के 25 सरकारी विद्यालयों में एआई-संचालित स्मार्ट क्लास से बच्चों को मिल रही आधुनिक शिक्षा

जिलाधिकारी अस्मिता लाल की पहल से जनपद बागपत में विज्ञान शिक्षा को नई दिशा मिली

, 17 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश में बालिकाओं की शिक्षा और वैज्ञानिक सोच को नई उड़ान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर अब सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बेटियां भी अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियां सीख रही हैं। बागपत जनपद के छपरौली ब्लॉक में स्थापित अत्याधुनिक एस्ट्रोनॉमी लैब ने ग्रामीण छात्राओं के सपनों को पंख दे दिए हैं।

ब्लॉक संसाधन केंद्र परिसर में बनाई गई इस हाईटेक खगोलशास्त्र प्रयोगशाला के माध्यम से छपरौली ब्लॉक की लगभग 100 बालिकाओं को आधुनिक विज्ञान को प्रत्यक्ष रुप से समझने का अवसर मिल रहा है। प्रयोगशाला में 45 प्रकार के प्रयोगों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे छात्राएं अंतरिक्ष से जुड़े जटिल सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से समझ पा रही हैं।
योगी सरकार के इस प्रयास से अब ग्रामीण पृष्ठभूमि की छात्राएं भी टेलिस्कोप संचालित करने से लेकर नाइट-स्काई ऑब्जर्वेशन तक की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं।

बागपत जिलाधिकारी की पहल से विज्ञान शिक्षा को नई दिशा
जनपद बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल की दूरदर्शी पहल से जिले में विज्ञान शिक्षा को नई गति मिली है। उनके मार्गदर्शन में ब्लॉक संसाधन केंद्र छपरौली में स्थापित एस्ट्रोनॉमी लैब को विकसित किया गया है।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि प्रयोगशाला में आधुनिक उपकरणों के साथ-साथ छात्राओं को एस्ट्रोनॉमी सॉफ्टवेयर के उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे वे आकाशीय पिंडों की स्थिति, गति और संरचना को डिजिटल माध्यम से समझ पा रही हैं। इस तरह का व्यावहारिक प्रशिक्षण छात्राओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में बेहद सहायक होगा।

टेलिस्कोप से चंद्रमा देख बढ़ रहा आत्मविश्वास
इस पहल की सबसे खास बात यह है कि अब छात्राएं स्वयं टेलिस्कोप के माध्यम से चंद्रमा और अन्य आकाशीय पिंडों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर रही हैं। जब एक बालिका अपने हाथों से टेलिस्कोप संचालित कर चंद्रमा देखती है, तो उसके भीतर आत्मविश्वास और जिज्ञासा दोनों का विकास होता है।

कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय छपरौली की सभी छात्राएं इस लैब में नियमित रूप से प्रशिक्षण ले रही हैं। नाइट-स्काई प्रेक्षण जैसी गतिविधियां उनके लिए रोमांचक अनुभव साबित हो रही हैं। शिक्षकों के अनुसार, इससे बालिकाओं की विज्ञान के प्रति रुचि तेजी से बढ़ी है और वे अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े करियर के बारे में गंभीरता से सोचने लगी हैं।

एआई-संचालित स्मार्ट क्लास से मिल रही आधुनिक शिक्षा
बागपत जनपद में शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिले के 25 सरकारी विद्यालयों में टैगहाइव द्वारा एआई-संचालित स्मार्ट क्लास शुरू की गई हैं। इन स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को इंटरैक्टिव और तकनीक आधारित शिक्षा मिल रही है, जिससे सीखने की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

×