चौधरी अजीत सिंह जी ने कभी स्वयं को बड़ा नेता नहीं माना, बल्कि हमेशा किसानों का संरक्षक और किसानों को अपना अभिभावक माना। यही उनकी सादगी, यही उनका बड़प्पन और यही उनकी असली पहचान थी।आज वे सशरीर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनकी सोच और उनकी राजनीति की विरासत बेहद विराट है। यह विरासत केवल शब्दों में नहीं, बल्कि खेत-खलिहानों की मिट्टी में बसती है… किसानों और मजदूरों की उम्मीदों में बसती है… हर उस आवाज़ में बसती है जो अपने हक के लिए खड़ी होती है।चौधरी साहब ने हमेशा किसानों की बेबाक आवाज बनकर उनकी लड़ाई लड़ी। उन्होंने सत्ता को सेवा का माध्यम माना और किसान, मजदूर व आमजन के सम्मान को सर्वोपरि रखा।आज उनकी जयंती पर हम सबका दायित्व है कि उनके सिद्धांतों, संघर्ष और सेवा भाव की इस विरासत को मजबूती से आगे बढ़ाएं और किसान हित की आवाज को और बुलंद करें।किसानों की बेबाक आवाज, पूर्व केंद्रीय मंत्री आदरणीय चौधरी अजीत सिंह जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। 🙏

subhashchand4

Bysubhashchand4

Feb 12, 2026
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ChaudharyAjitSingh

किसान_हित

रालोद

चौधरी अजीत सिंह जी ने कभी स्वयं को बड़ा नेता नहीं माना, बल्कि हमेशा किसानों का संरक्षक और किसानों को अपना अभिभावक माना। यही उनकी सादगी, यही उनका बड़प्पन और यही उनकी असली पहचान थी।
आज वे सशरीर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनकी सोच और उनकी राजनीति की विरासत बेहद विराट है। यह विरासत केवल शब्दों में नहीं, बल्कि खेत-खलिहानों की मिट्टी में बसती है… किसानों और मजदूरों की उम्मीदों में बसती है… हर उस आवाज़ में बसती है जो अपने हक के लिए खड़ी होती है।
चौधरी साहब ने हमेशा किसानों की बेबाक आवाज बनकर उनकी लड़ाई लड़ी। उन्होंने सत्ता को सेवा का माध्यम माना और किसान, मजदूर व आमजन के सम्मान को सर्वोपरि रखा।
आज उनकी जयंती पर हम सबका दायित्व है कि उनके सिद्धांतों, संघर्ष और सेवा भाव की इस विरासत को मजबूती से आगे बढ़ाएं और किसान हित की आवाज को और बुलंद करें।
किसानों की बेबाक आवाज, पूर्व केंद्रीय मंत्री आदरणीय चौधरी अजीत सिंह जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। 🙏

ChaudharyAjitSingh

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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