Spread the love

ठंड बढ़ते ही सक्रिय हुए नगर निकाय, कई जगहों पर शुरू हुई अलाव व्यवस्था

नितिन कुमार सिंह, 7.12, बागपत। जनपद में ठंड का असर लगातार गहराता जा रहा है। न्यूनतम तापमान में आई गिरावट और सुबह-शाम की तेज ठिठुरन को देखते हुए जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में नगर निकायों ने अलाव की व्यवस्था शुरू कर दी है। यह कदम उन जरूरतमंदों और राहगीरों के लिए राहतकारी साबित हो रहा है, जिन्हें देर रात या सुबह के समय खुले स्थानों पर ठंड का सामना करना पड़ता है।

जिलाधिकारी के निर्देशानुसार नगर पालिका बागपत, बड़ौत और खेकड़ा सहित नगर पंचायतों ने प्रमुख चौराहों, बस स्टैंड, सब्जी मंडियों, बाजार क्षेत्रों, सामुदायिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अलाव जलाने की व्यवस्था की है।

रिक्शा चालकों, श्रमिकों, दुकान बंद करने के बाद लौटने वाले लोगों और बस-स्टैंड पर रात गुजारने वालों के लिए यह बेहद उपयोगी है। कई वृद्धजन भी देर शाम के समय अलाव के आसपास बैठते दिखाई दिए। ठंड का प्रकोप बढ़ने पर अलाव बिंदुओं की संख्या में वृद्धि की जाएगी और नियमित निगरानी रखी जाएगी ताकि कोई भी व्यक्ति ठंड से परेशान न हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

×