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बड़ौत ::- रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दिल्ली-शामली रेलवे लाइन का दोहरीकरण होगा। इसको लेकर अक्तूबर में कार्रवाई शुरू करा दी गई है। यह कार्य तीन साल में पूरा करा दिया जाएगा और उसके बाद यहां नमो भारत रैपिड ट्रेन चलाई जाएगी। रेल मंत्री सोमवार को बड़ौत रेलवे स्टेशन पर दिल्ली-शामली तक दो नई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने आए थे। रेल मंत्री ने कहा कि दिल्ली-शामली रेलवे लाइन पर जब मालगाड़ी गुजरती है तो सिंगल लाइन होने के कारण अन्य गाड़ियां खड़ी रहती हैं। इसलिए गोठरा व अलावलपुर को क्रॉसिंग स्टेशन बनाया जाएगा। इस तरह क्रॉसिंग के समय गाड़ियां खड़ी करने के लिए शामली के हिंड व सहारनपुर के नानौता स्टेशनों पर लूप लाइन बनाई जाएगी। दिल्ली-बागपत-शामली-सहारनपुर रेलवे लाइन को मुख्य लाइन से जोड़ने की तैयारी है। इसलिए दिल्ली-शामली रेलवे लाइन पर जहां पहले ट्रेनों की स्पीड 70-80 किमी प्रति घंटा होती थी, वह अब कई जगह पटरी बदलने से 120 किमी प्रति घंटा हो गई। उन्होंने बताया कि शामली के स्टेशन को 25 करोड़ की लागत से अमृत भारत बनाया जा रहा है और उसका कार्य जल्द पूरा हो जाएगा। दिल्ली-शामली और दिल्ली-हरिद्वार की ट्रेनों में पिछले महीने बढ़ाए गए कोच को लेकर भी उन्होंने जानकारी दी।

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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