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ऋषिकेश में भीषण बस हादसा: 5 श्रद्धालुओं की मौत, 13 घायल।

ऋषिकेश से सटे जनपद टिहरी गढ़वाल के नरेंद्र नगर क्षेत्र में सोमवार को एक बड़ा सड़क हादसा उस समय घटित हो गया जब दर्शन कर लौट रही तीर्थयात्रियों से भरी बस संख्या UK14 PA 1769 बैक करते समय अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। ऋषिकेश के सदानंद आश्रम से मां कुंजापुरी मंदिर के दर्शनों को गए यात्रियों की इस बस हादसे में 5 श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 13 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। दुर्घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी टिहरी आयुष अग्रवाल घटनास्थल के लिए रवाना हुए और राहत-बचाव में जुटी पुलिस, एसडीआरएफ एवं फायर सर्विस को आवश्यक निर्देश दिए। नरेंद्र नगर पुलिस ने स्थानीय जनता की मदद से घायलों का त्वरित रेस्क्यू कर उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जिनमें से पांच को एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया है जबकि अन्य घायलों का उपचार नरेंद्र नगर अस्पताल में चल रहा है। हादसे में घायल यात्रियों की पहचान नरेश चौहान (दिल्ली), दीक्षा (अंबाला), बालकृष्ण आनंद (गुजरात), अर्चिता गोयल (मुंबई), चैतन्य जोशी (गुजरात), विनोद पांडे (मोतिहारी), प्रशांत ध्रुव व प्रतिभा ध्रुव (अहमदाबाद), शिवकुमार शाह व माधुरी (मुंबई), शंभू सिंह (हरिद्वार), राखी (वाराणसी) और दीपशिखा (पंजाब) के रूप में हुई है। वहीं मृतकों में अनीता चौहान (दिल्ली), पार्थसाथी मधुसूदन जोशी (गुजरात), नमिता प्रभु, अनुज वेंकटरमन पुत्री अमित गोयल तथा श्रीमती आशु त्यागी (सहारनपुर) शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि घटना की विस्तृत जांच की जा रही है।

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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