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1830 – समाज सुधारक राजा राम मोहन राय इंग्लैंड के लिए रवाना हुए।
1906 – थलाकल चंडू का बलिदान हुआ।
1936 – नाजी जर्मनी और जापान के बीच कोमिंट्रन विरोधी संधि पर हस्ताक्षर किये गये।
1947 – विश्व स्वास्थ्य संगठन संयुक्त राष्ट्र का विशिष्ट अभिकरण बन गया।
1949 – महात्मा गांधी की हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे और नारायण दत्तात्रेय आप्टे को फाँसी दी गई।
1961 – संयुक्त राष्ट्र ने परमाणु हथियारों पर रोक लगाई।
1988 – पी.एल.ओ. के अध्यक्ष यासर अराफात द्वारा फ़िलिस्तीन स्वतंत्र राष्ट्र घोषित।
1989 – बंगाल के रानीगंज मे महावीर कोयला खदान से 65 मजदूरों का सफल बचाव अभियान हुआ।
2000 – झारखंड भारत का 28वां राज्य बना।
2007 – एरियाना-5 रॉकेट ने ब्रिटेन व ब्राजील के दूरसंचार उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित किया।
2008 – भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर वाई वेणुगोपाल रेड्डी को वैश्विक वित्तीय प्रणाली में सुधार की जाँच के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा गठित टास्क फोर्स में शामिल किया गया।

जन्मदिवस

1866 – भारत की प्रथम महिला बैरिस्टर कार्नेलिया सोराबजी का जन्म हुआ।
1875 – भारत प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक आदिवासी नेता बिरसा मुण्डा का जन्म हुआ।
1885 – प्रयोग धर्म शिक्षक गिजुभाई का जन्म हुआ।
1986 – ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित भारतीय वायु सेना के शहीद गरुड़ कमांडों में से एक ज्योति प्रकाश निराला का जन्म हुआ।

पुण्यतिथि

1937 – हिन्दी साहित्यकार जयशंकर प्रसाद का निधन हुआ।
1938 – पंजाब के प्रसिद्ध आर्य समाजी नेता, समाज सुधारक और शिक्षाविद महात्मा हंसराज का निधन हुआ।
1982 – सामाजिक कार्यकर्ता विनोबा भावे का निधन हुआ।
2013 – मथुरा के प्रसिद्ध संत, जिन्होंने विख्यात ‘प्रेम मंदिर’ का निर्माण करवाने वाले कृपालु महाराज का निधन हुआ।
2021 – छत्रपति शिवाजी महाराज की कीर्ति का अखंड गुणगान करने वाले ‘शिवशाहीर’ बाबासाहेब पुरंदरे का निधन हुआ।

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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