Spread the love

बड़ौत ::- दोघट से हरिसिंह की समाधि से होते हुए चित्तमखेड़ी और टांडा-छपरौली मार्ग से नांगल मार्ग का निर्माण 2.11 करोड़ रुपये से कराया जाएगा। इससे दस से अधिक गांवों के ग्रामीणों को सुविधा मिलेगी। दोघट से हरिसिंह की समाधि से होते हुए चित्तमखेड़ी और टांडा-छपरौली मार्ग से नांगल गांव जाने वाले मार्ग से दस से अधिक गांव जुड़े हुए हैं। पिछले काफी समय से दोनों मार्गों की हालत जर्जर होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। साथ ही सड़क हादसे भी हो रहे थे। ग्रामीणों ने छपरौली विधायक डॉ. अजय कुमार के सामने समस्या उठाई तो उन्होंने पहल करते हुए लोक निर्माण विभाग के अफसरों से मार्गों के निर्माण का प्रस्ताव तैयार कराया। शासन ने दोघट से हरिसिंह की समाधि से होते हुए चित्तमखेड़ी तक मार्ग निर्माण के लिए 1.26 करोड़ रुपये और टांडा-छपरौली मार्ग से नांगल गांव तक मार्ग निर्माण के लिए 84 लाख रुपये बजट खर्च करने की मंजूरी दी। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अतुल कुमार ने बताया कि जल्द ही दोनों मार्गों पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

×