Spread the love

जिलाधिकारी के निर्देशन में जनपद के सभी नगर निकायों में शुरू हुआ ट्रांसफॉर्मर्स की बैरिकेडिंग का कार्य

ट्रांसफॉर्मर्स की आकर्षक एवं व्यवस्थित बैरिकेडिंग से शहर बनेगा सुरक्षित और सुंदर

बागपत,03 नवंबर 2025: जनपद में विद्युत उपकरणों से जुड़ी घटनाओं से बचाव और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी अस्मिता लाल के निर्देशन में नगर निकायों में सड़क किनारे स्थित सभी ट्रांसफॉर्मरों की बैरिकेडिंग का कार्य शुरू किया गया है।

यह बैरिकेडिंग कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, यह ट्रांसफॉर्मरों को यांत्रिक क्षति, चोरी और वैंडलिज़्म से बचाएगी। इसके साथ ही धूल, मलबा और पालतू या वन्य जानवरों से उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। आग या विस्फोट जैसी आपात स्थितियों में यह फैलाव को नियंत्रित कर आसपास के उपकरणों और नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी।

बैरिकेडिंग का डिजाइन आकर्षक और सुरक्षित है, जिससे शहर की सुंदरता बनी रहे और पैदल मार्गों, आवासीय क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा बढ़े। इसके माध्यम से विद्युत कर्मियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। बैरिकेडिंग पर “विकसित भारत, विकसित नगर निकाय” संदेश अंकित है, जो जागरूकता फैलाने में मदद करेगा।

विद्युत विभाग एवं संबंधित नगर निकाय की टीम इस कार्य की नियमित निगरानी कर रही है और इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल से बागपत जिले में जनहित, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और सुरक्षित शहरी विकास की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ा है।

सूचना विभाग बागपत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

×