Spread the love

राष्ट्रीय लोकदल के सदस्यता अभियान के तहत आज ग्राम फतेहपुर चक और हिम्मतपुर सुजती में सदस्यता अभियान कार्यक्रम आयोजित किए गए। दोनों ही सभाओं का नेतृत्व सदस्यता अभियान प्रभारी डॉ. अनिल आर्य ने किया जिनमें सर्वसमाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और राष्ट्रीय लोकदल से जुड़ने का संकल्प लिया।

ग्राम फतेहपुर चक में आयोजित सभा हरेंद्र तोमर के आवास पर हुई, जिसकी अध्यक्षता मास्टर सत्यवीर सिंह ने की और संचालन हरेंद्र तोमर ने किया। कार्यक्रम में लगभग 125 से 150 लोगों ने लोकदल की सदस्यता ग्रहण की।

वहीं ग्राम हिम्मतपुर सुजती में कश्यप चौपाल पर आयोजित बैठक में स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर लोकदल की विचारधारा का समर्थन किया। कार्यक्रम का संचालन कुलवीर राठी ने किया।

पूर्व विधायक वीरपाल राठी ने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजीत सिंह द्वारा किसानों व आमजन के हित में किए गए ऐतिहासिक कार्यों को याद किया।

डॉ. अनिल आर्य ने कहा कि “राष्ट्रीय लोकदल ही किसानों, मजदूरों और युवाओं की सच्ची आवाज़ है। आज समाज को चौधरी चरण सिंह के आदर्शों पर चलकर एकता और सम्मान की राजनीति को पुनः स्थापित करना होगा।”

कार्यक्रमों में विधानसभा छपरौली प्रभारी मास्टर आनंद छिल्लर,श्री जितेंद्र कंडेरा, विक्रम सिंह, अरविंद सिंह, वीरेंद्र सिंह, ओंकार सिंह, धीरज सिंह, पूर्व प्रधान जयवीर सिंह, हरवीर सिंह, नरेंद्र सिंह, भूपेंद्र सिंह, रामपाल सिंह, मास्टर चेनपाल सिंह, राठी खाप चौधरी जीत सिंह, किरतपाल, मास्टर शौकीन, हरख्याल उपाध्याय, ओमबीर कश्यप, मुन्नी कश्यप, प्रेम कश्यप, चमन कश्यप, लक्ष्मण, सतवीर, दरियाव, सेवाराम आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

दोनों गांवों के कार्यक्रमों में भारी उत्साह देखने को मिला और बड़ी संख्या में लोगों ने राष्ट्रीय लोकदल की सदस्यता ग्रहण की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

×