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स्वयं भगवान उसके सपने में आकर प्रार्थना करते हैं कि_
जा दलित जज पर जुता मार..!

ऐसा अद्भुत ईश्वर से अटैच भगवा अधिवक्ता है..
लेकिन अब उसकी फटी पड़ी है.
डर के मारे घर से निकलना बंद है..
और भगवान काम नहीं आ रहे..
सज़ा से बचने के लिये ईश्वर कनेक्शन काम नहीं कर रहा..
SC/ST एक्ट से बचने के लिये झूठ बोलना पड़ रहा है कि साबित नहीं कर सकता पर‌ दलित है..
जूता फेंकने को कहने के लिये आने वाले_अब मदद को नहीं आ रहे..
क्या भगवान उसका मोदिया काट रहे हैं..?

उसकी स्कूटी गाय, कुत्ते से नहीं‌ सिर्फ बकरियों को टच करती थी, फिर वो पिटता था
और उसकी पत्नी को वो उठाकर ले जाते थे..
वो चली जाती थी..
वो छोड़ जाते थे..
वो आ जाती थी..
वो फिर उठाकर ले जाते थे..
वो चली जाती थी..
एक वकील होने के नाते उसने इसकी कभी FIR नहीं की..?

और बार बार पत्नी को उठा ले जानेवालों का मुहल्ला नहीं छोड़ा..?
ऐसा उठाना-छोड़ना चलते रहने दिया..
तो हो सकता है कि उसकी पत्नी उसके मोडियापे से मन बहला रही हो..
जब इसकी पत्नी को उठाकर ले जाया जाता था, तब इसने जूता नहीं मारा,
लेकिन CJI पर जूता फेंक दिया..पत्नी उठा ले जाने वालों पर जुता नहीं फैंका..

नाथूराम ने भी कभी अंग्रेजों पर गोली नहीं चलाई..लेकिन मुसलमान का भेष धरकर
एक बूढ़े महात्मा को तीन गोलियाँ मारीं..!!

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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