Spread the love

लखनऊ 29 सितम्बर 2025*

महिला कल्याण एवं बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा संचालित प्रयासों के सकारात्मक परिणाम लगातार सामने आ रहे हैं। प्रमुख सचिव महिला कल्याण एवं बाल विकास सेवा पुष्टाहार, श्रीमती लीना जौहरी की गहन निगरानी एवं सकारात्मक निर्देशों के अंतर्गत विभाग द्वारा जनपद-जनपद में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की जा रही हैं।

इसी क्रम में नगर पंचायत रटोल, जनपद बागपत की नन्हीं बच्ची सनाया की सफलता की कहानी प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करती है। निर्धन परिवार से संबंध रखने वाली सनाया गंभीर कुपोषण (SAM) से जूझ रही थी। आंगनवाड़ी केंद्र पर नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान बच्ची का वजन मात्र 6.7 किलोग्राम और लंबाई 67 सेमी दर्ज की गई। बच्ची अत्यधिक कमजोर, पीलिया से ग्रसित और बार-बार बीमार पड़ रही थी।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (AWW), RBSK टीम एवं CDPO ने त्वरित हस्तक्षेप किया। बच्ची को 25 जुलाई को पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराया गया। जहाँ उसे 15 दिनों तक चिकित्सकीय देखभाल, पौष्टिक आहार और आवश्यक दवाइयाँ उपलब्ध कराई गईं। इसके साथ ही, बच्ची की मां को स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी व्यवहार परिवर्तन हेतु परामर्श व प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

निरंतर देखभाल एवं पौष्टिक आहार से मात्र 15 दिनों में बच्ची का वजन 8.5 किलोग्राम और लंबाई 70 सेमी तक पहुँच गई। अब सनाया स्वस्थ, सक्रिय एवं सामान्य विकास की राह पर अग्रसर है। यह बदलाव परिवार के लिए नई खुशी और भरोसे का स्रोत बना।

यह सफलता विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है, जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, CDPO एवं RBSK टीम की सक्रिय भूमिका रही। उनके संयुक्त प्रयासों से एक नन्हीं जान को गंभीर कुपोषण से बाहर निकालकर स्वस्थ जीवन प्रदान किया जा सका।

यह उपलब्धि स्पष्ट करती है कि प्रमुख सचिव श्रीमती लीना जौहरी के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा किए जा रहे समर्पित प्रयासों से न केवल कुपोषण जैसी चुनौती पर विजय पाई जा रही है, बल्कि नन्हें जीवन को स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

सूचना विभाग बागपत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

×