Spread the love

जिला कारागार का उच्चस्तरीय निरीक्षण न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सम्पन्न

निःशुल्क विधिक सहायता सुनिश्चित कराने के लिए दिए निर्देश

बागपत, 24 सितंबर 2025 — जनपद न्यायाधीश मनोज कुमार, जिलाधिकारी अस्मिता लाल एवं पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय ने आज जिला कारागार बागपत का संयुक्त रूप से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कारागार की व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा 70 वर्ष से अधिक आयु के बंदियों से संवाद कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त की।

संबंधित चिकित्सक को उनके स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान महिला बैरक, चिकित्सालय, पाकशाला (रसोईघर) एवं हाई सिक्योरिटी बैरक का गहन निरीक्षण किया गया। जिला जज एवं जिलाधिकारी ने महिला बैरक में निरुद्ध महिला बंदियों से उनके खानपान एवं अन्य समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा कैदियों के बच्चों से स्नेहपूर्वक वार्ता कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन महिला बंदियों के पास सरकारी अधिवक्ता उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

अस्पताल वार्ड का निरीक्षण कर बंदियों के स्वास्थ्य की जानकारी ली गई तथा यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि समय-समय पर उनका स्वास्थ्य परीक्षण नियमित रूप से किया जाए। हाई सिक्योरिटी बैरक में भी कैदियों से संवाद कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली गई। इसके पश्चात पाकशाला का निरीक्षण किया गया, जहां भोजन चार्ट के अनुरूप पाया गया। जिला जज एवं जिलाधिकारी ने जेल अधीक्षक को निर्देशित किया कि सभी कैदियों को भोजन एवं नाश्ता प्रतिदिन चार्ट के अनुसार शुद्धता के साथ उपलब्ध कराया जाए और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए।

इस अवसर पर जेल अधीक्षक एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

सूचना विभाग बागपत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

×