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श्रमिक एसोशिएशन बड़ौत बागपत के अध्यक्ष प्रवीण वर्मा ने आज भाजपा नेताओं रविन्द्र आर्य भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ बागपत के सहसंयोजक,मनोज कुमार युवा भाजपा नेता, सौरभ जैन मंडल कोषाध्यक्ष भाजपा, राजगोपाल कशयप बड़ौत नगर उपाध्यक्ष भाजपा,विनय कुमार निखिल कश्यप थे।
बुधवार साप्ताहिक मार्केट बंदी आदेश को प्रभावी ढंग से लागू करा कर श्रमिकों को साप्ताहिक अवकाश दिलाने,
बड़ौत में 7 सालों से बंद पड़े बड़ौत श्रम प्रवर्तन अधिकारी के कार्यालय का ताला खुलवाने हेतु न ए श्रम प्रवर्तन अधिकारी की बड़ौत में अलग से नियुक्ति करने।
भारत सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी दिलाने।
काम के घंटे 12- से घटा कर -9 कराने।
साप्ताहिक मार्केट बंदी के दिन मजदूरी कराने पर डबल मजदूरी देने।
सातो दिन दुकान खोलने का लाईसेंस प्राप्त दुकानों के लाईसेंस का मानक चैक कर मानको पर खरा नहीं उतरने वाले दुकानों के लाईसेंस निरस्त करने।
जो दुकानें सातो दिन खुलती हैं उनके श्रमिकों को भी साप्ताहिक अवकाश दिलाने।
श्रमिकों को मजदूरी बैंक से दिलाने।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य यूपी सरकार के पांच बार पूर्व में दिए साप्ताहिक मार्केट बंदी के आदेश का पालन नहीं कराने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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