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गर्व से कहो हम हिन्दू हैं कहने वाले शूद्रों ! Viral

केवल एक फायदा बता दो हिन्दुत्व पर गर्व करने से 85% वाले शूद्र समाज को मिला हो या मिलने की संभावना हो ?हिन्दू धर्म तुम्हारे द्वार पर बँधी उस गाय…

रामायण व महाभारत के रचयिता क्रमशः वाल्मीकि और व्यास ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वे जो कहानियां लिख रहे हैं भविष्य में उनके वंशज उन्हें वास्तविक इतिहास के रूप में स्थापित कर देंगे और शूद्र शिक्षित होकर भी हमारे द्वारा कल्पित पात्रों की पूजा अर्चना करेंगे ।मजे की बात यह है कि वाल्मीकि और व्यास ने कभी खुद को इतिहास कार होने का दावा भी नहीं किया ।मनगढ़ंत कहानियों और इतिहास में फर्क करना शूद्र समाज कब सीखेगा ?परशुराम जैसा पात्र जो सतयुग में अपने फरसे से गणेश का एक दाँत तोड़कर एकदंत बना देता है त्रेता की कहानी रामायण में भी जनक के यहाँ रखी उसके गुरु शंकर की धनुष टूटने पर जनक सहित राम लक्ष्मण और अन्य राजाओं को धमकाता है एवं पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रिय विहीन करने की डींग हाँकता है और उस समय भी वही अपना प्रिय हथियार फरसा लहराता है।कथित द्वापर युग की कहानी महाभारत में भी वही पात्र उसी परशुराम नाम से कौरवों पांडवों के दादा भीष्म और सूर्य पुत्र कर्ण को भी धनुवर्विद्या सिखाता है ।उसी परशुराम को ब्राह्मण भगवान का अवतार बताकर भगवान परशुराम कहते हैं और जयंती भी मनाते हैं ।विचारणीय प्रश्न यह है कि जब भगवान का एक अवतार सतयुग से ही मौजूद था तो त्रेता और द्वापर में क्रमशः राम और कृष्ण के रूप में राक्षसों का वध करने के लिए अवतार लेने की आवश्यकता ही क्या थी ?कहानियों में राम, कृष्ण आदि कथित अवतारों को पैदा होना और इंसान की तरह ही मरना बताया गया है किन्तु परशुराम तीनों युगों में एक योद्धा के रूप में ही जीवित रहता है जबकि एक एक युग को हजारों लाखों साल का बताया गया है ।लोहे का आविष्कार अभी चार हजार साल पहले हुआ तो परशुराम को सतयुग, त्रेता, द्वापर में लोहा कहाँ से मिला फरसा बनवाने को ?इससे यही सिद्ध होता है किरामायण महाभारत सभी ब्राह्मणों द्वारा लिखीकाल्पनिक कहानियां हैं वास्तविक इतिहास नहीं इस अकाट्य सत्य को शूद्र समाज जितनी जल्दी समझ ले और इन गप्प ग्रंथों के मकड़जाल से खुद को मुक्त कर ले उतना ही देश ,समाज और भावी पीढ़ियों के हित में होगा ।शूद्र समाज यानी एससी एसटी ओबीसी वर्ग की संख्या 85% होते हुए भी भारत का शासक नहीं 15% सवर्णों द्वारा शासित वर्ग है उसका मुख्य कारण ही यही है कि शूद्र समाज ब्राह्मणों के विराट प्रचार तंत्र का शिकार होकर ब्राह्मणों द्वारा लिखे झूठे व काल्पनिक इतिहास को धर्म मानकर सीने से चिपकाये हुए है ,और शूद्रों के मान सम्मान और मानवीय अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष करनेवाले अपने समता वादी, मानवतावादी वैज्ञानिक विचारधारा वाले महापुरुषों के त्यागमयी और संघर्ष पूर्ण सच्चे इतिहास से अनभिज्ञ है या यों कहें कि शिक्षा व्यवस्था और अन्य सभी प्रचार माध्यमों पर ब्राह्मणों का कब्जा होने के कारण मानवता वादी महापुरुषों के बारे में शूद्रों को जानने ही नहीं दिया।

यह सब अनायास नहीं ब्राह्मण शाही को कायम रखने के लिए सोच समझकर षडयंत्र पूर्वक किया जा रहा है इस षडयंत्र को शूद्र समाज को समझने और अपने समता वादी…

आँचल के नेतृत्व में रेतवा में निःशुल्क मोस्ट पाठशाला का हुआ उद्घाटन

समाज की उन्नति के लिए सर्वाधिक जोर बुनियादी शिक्षा पर दिया जाना चाहिए : श्यामलाल सुलतानपुर। बीते मंगलवार को देर सायं विकास खण्ड पी.पी. कमैचा के साढ़ापुर (रेतवा) में निःशुल्क…

क्रोध एक भयंकर शत्रु।रवि शास्त्री।आर्य प्रतिनिधि सभा बागपत के द्वारा जून माह में चौधरी केहर सिंह दिव्य पब्लिक स्कूल बड़ौत में आयोजित होने वाले आवासीय संस्कार शिविर के लिए शिव शक्ति इंटरनेशनल स्कूल ढिकोली में पहुंचकर एकदिवसीय सेमिनार में सभा मंत्री रवि शास्त्री ने बच्चों को शिविर में आने का आह्वान किया

क्रोध एक भयंकर शत्रु।रवि शास्त्री।आर्य प्रतिनिधि सभा बागपत के द्वारा जून माह में चौधरी केहर सिंह दिव्य पब्लिक स्कूल बड़ौत में आयोजित होने वाले आवासीय संस्कार शिविर के लिए शिव…

मैं सना चौधरी, 💐

आपकी बेटी और आपकी बहन, पिछले कुछ दिनों से गांव में गैस एजेंसी से जुड़ी लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मौके पर पहुंची। वहां लोगों से…

दूरदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण को लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कांग्रेस सांसद टीएन प्रथापन ने याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि यह भाषण आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करता है। याचिका में कहा गया है कि सरकारी प्रसारण माध्यमों के जरिए चुनावी माहौल में विपक्ष पर निशाना साधना निष्पक्षता के सिद्धांत के खिलाफ है। याचिका के अनुसार, 18 अप्रैल की रात प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण विधेयक से जुड़े घटनाक्रम के तुरंत बाद राष्ट्र को संबोधित किया और अपने भाषण में कई विपक्षी दलों का नाम लेकर आलोचना की। आरोप है कि यह संबोधन दूरदर्शन और संसद टीवी जैसे सरकारी संसाधनों के माध्यम से प्रसारित किया गया, जो पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में हैं, इसलिए इसका उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए। कांग्रेस सांसद ने अपनी अर्जी में कहा है कि सक्रिय चुनाव अवधि के दौरान इस तरह का प्रसारण मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश है और यह आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह इस मामले में उचित कार्रवाई करे। गौरतलब है कि यह भाषण उस समय दिया गया था जब महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका था। इस मुद्दे पर पहले से ही राजनीतिक माहौल गरम था और अब यह मामला कानूनी बहस का विषय बन गया है।

दूरदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण को लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कांग्रेस सांसद टीएन प्रथापन ने याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि यह भाषण…

पोज एज ए फ्रेंडएक्ट एज आ स्पाई!!

रॉबर्ट ग्रीनी की किताब पढ़ता हुआ शख्स, पॉवरफुल हो सकता है। लेकिन मित्र, सहयोगी, प्रेमी या किसी का वेल विशर नही हो सकता।●●यह किताब जो सिखाती है, वह 48 नियम…

मोदी सरकार से सवाल:—

🇮🇳सेना में अग्निवीर जवान लगातार आत्महत्या क्यों कर रहे हैं? 🇮🇳क्या सेना को पहले की भांति सक्षम और मेरिट वाले युवा मिल पा रहे हैं? पहले 1600 मीटर की दौड़…

सुबह 3 बजे की बड़ी खबरें……………….

➡लखनऊ- बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन, मेस में खराब खाना खाने से छात्रा की मौत का आरोप, यूनिवर्सिटी प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप, महिला छात्रावास में खराब…

किन्नरों का बधाई लेना कानूनी अधिकार नहीं:हाईकोर्टलखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट खंडपीठ लखनऊ का किन्नरों की बधाई वसूली पर फैसला।बधाई लेना कानूनी अधिकार नहीं- हाईकोर्ट।गोंडा की किन्नर रेखा देवी की याचिका ख़ारिज।क्षेत्रीय अधिकार तय करने की मांग भी ख़ारिज।कोर्ट ने परंपरा को कानूनी मान्यता देने से किया इनकार।बिना कानूनी आधार किसी से धन वसूली अवैध: हाईकोर्ट।याचिकाकर्ता ने वर्षों पुरानी प्रथा का दिया था हवाला।ऐसी प्रथा को संरक्षण नहीं दिया जा सकता- कोर्ट।कानून के दायरे में ही वसूली संभव-कोर्ट।कोर्ट ने स्पष्ट किया जब अधिकार ही नहीं तो सीमांकन भी नहीं।बधाई वसूली के लिए क्षेत्र बांटने की मांग खारिज।

किन्नरों का बधाई लेना कानूनी अधिकार नहीं:हाईकोर्टलखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट खंडपीठ लखनऊ का किन्नरों की बधाई वसूली पर फैसला।बधाई लेना कानूनी अधिकार नहीं- हाईकोर्ट।गोंडा की किन्नर रेखा देवी की याचिका ख़ारिज।क्षेत्रीय…

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अपने अखबार या पत्रिका (Print Media) को केंद्रीय संचार ब्यूरो (Central Bureau of Communication – CBC) से जोड़ने यानी एम्पैनलमेंट (Empanelment) कराने के लिए आपको ऑनलाइन आवेदन करना होता है।इसके माध्यम से आपके अखबार को सरकारी विज्ञापन मिलने की प्रक्रिया शुरू होती है।जरूरी शर्तें और प्रक्रिया RNI / PRGI रजिस्ट्रेशन: आपके समाचार पत्र के पास प्रेस रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (PRGI / RNI) का वैध पंजीकरण होना चाहिए।नए नियमों के तहत प्रेस सेवा पोर्टल के जरिए प्रक्रिया पूरी की जाती है।आधिकारिक वेबसाइट: सीबीसी से जुड़ने या आवेदन करने के लिए आपको केंद्रीय संचार ब्यूरो की आधिकारिक वेबसाइट https://cbcindia.gov.in पर जाना होगा।ऑनलाइन आवेदन विंडो: सीबीसी समय-समय पर नए प्रकाशनों (Publications) के एम्पैनलमेंट के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करता है। जब पोर्टल पर आवेदन विंडो खुली हो, तब आप वेंडर या पब्लिशर पोर्टल पर जाकर अपने अखबार के कागजात और डिटेल्स के साथ अप्लाई कर सकते हैं। बिना किसी एजेंट के सतर्क रहें:सीबीसी स्पष्ट करता है कि एम्पैनलमेंट पूरी तरह से पारदर्शिता और योग्यता के आधार पर होता है। इसके लिए किसी भी एजेंट या बिचौलये को रिश्वत या कमीशन न दें।लेटेस्ट अपडेट्स और आवेदन फॉर्म भरने के लिए सीधा CBC Vendor Login / Website पर विजिट करें।

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