राखी कश्यप ने किसका मर्डर किया यहां पर यह बात में नहीं कहना चाहूंगा लेकिन एक बात जरूर कहूंगा जो महिला अपने मां-बाप के कंट्रोल में नहीं है अपने सास ससुर के पति के खाने में नहीं है जिसे अपने परिवार की महिला पुरुषों की कोई परवाह नहीं है जो अपने हुकुम चलाना चाहती है जो अपने आप को सक्षम समझने लगे और अपनी नौकरी अपने व्यापार अपने रंग रूप आदि का घमंड करने लगे उसको कोई सुधार नहीं सकता एक दिन कहते हैं समय बड़ा बलवान होता है किसी न किसी दिन समय उसको समझा देता है यही बात पुरुषों पर भी लागू होती है जो पुरुष अपने बड़े बुजुर्गों का मान सम्मान नहीं करता और न जाने किस घमंड में जीना चाहता है एक दूसरे की बात नहीं मानता एक न एक दिन उसका भी हर्ष बुरा होता है। उसे भी अगर कोई समझ सकता है तो वह समय है समय एक न एक दिन उसे पुरुष को भी समझा देता है।
खाने का तात्पर्य यह है कि चाहे महिला हो चाहे पुरुष हो जो परिवार पारिवारिक बंधन में बंद के चलता है पारिवारिक प्रोटोकॉल को मानता समझता है और उनका सम्मान…