सुबह की देश राज्यों से बड़ी खबरे….

=============================== 1 अमेरिका ने ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की, UAE का दावा- होर्मुज में टैंकर पर हमले में एक भारतीय की मौत; US ईरान की नाकेबंदी शुरू करेगा 2 अमेरिका…

आज का राशिफल14 जुलाई 2026 , मंगलवार

आषाढ़ी देवपितृकार्य भौमवती अमावस्या आज मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)आज का दिन अच्छा रहेगा। राजकाज में संघर्ष होगा। दैनिक रोजगार में प्रगति होगी। मन प्रसन्न…

🔴जन्म देते ही जुड़वाँ बेटियों को माँ ने ठुकरा दिया तो उसका इलाज करने वाली अविवाहित महिला डॉ. कोमल यादव ने उन्हें अपना लिया.

अस्पताल प्रबंधन ने समझाया लेकिन उसने एक नहीं सुनी। सभी औपचारिकताएं पूरी कर सोमवार को वह दोनों बेटियों को लेकर अपने गाँव पहुँची तो पूरे गाँव ने उसे हाथोंहाथ लिया।…

क्रिस्टू ज्योति कॉन्वेंट स्कूल की छात्रानिमिसीका शर्मा सुपुत्र ललित शर्मा वह गीता शर्मा निवासी गुराना रोड बड़ौत बागपत अपने पिछले दिनों जोनल लेवल योग कंपटीशन में स्वर्ण पदक लाकर अपने घर का ही नहीं बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है..!!

क्रिस्टू ज्योति कॉन्वेंट स्कूल की छात्रानिमिसीका शर्मा सुपुत्र ललित शर्मा वह गीता शर्मा निवासी गुराना रोड बड़ौत बागपत अपने पिछले दिनों जोनल लेवल योग कंपटीशन में स्वर्ण पदक लाकर अपने…

सुबह 4 बजे की देश राज्यों से बड़ी खबरें

=============================== 1 राम मंदिर चढ़ावा चोरी- सुप्रीम कोर्ट ने SIT रिपोर्ट मांगी, पूछा- जांच अधिकारी कौन; यूपी-केंद्र और ट्रस्ट को नोटिस, CCTV सुरक्षित रखने का निर्देश 2 सुप्रीम कोर्ट बोला-…

शाम की देश राज्यों से बड़ी खबरें

=============================== 1 राम मंदिर चढ़ावा चोरी- सुप्रीम कोर्ट ने SIT रिपोर्ट मांगी, पूछा- जांच अधिकारी कौन; यूपी-केंद्र और ट्रस्ट को नोटिस, CCTV सुरक्षित रखने का निर्देश 2 सुप्रीम कोर्ट बोला-…

अयोध्या। धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे ने राम मंदिर गबन मामले में सीओ सिटी श्रीयश त्रिपाठी को साक्ष्य सौंपे।

अयोध्या।धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे ने राम मंदिर गबन मामले में सीओ सिटी श्रीयश त्रिपाठी को साक्ष्य सौंपे। बीती देर रात उन्होंने एसआईटी के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना…

स्वर्ग, नरक और हम

मृत्यु के बाद स्वर्ग मिले—इस आशा में मनुष्य जीवन भर कितने जतन करता है। कोई व्रत रखता है, कोई दान-पुण्य करता है, कोई तीर्थों की यात्रा करता है, तो कोई…

“संगठन में बहुत भीड़ हो गई है और इस भीड़ में अच्छे इंसानों की कमी है”यह कथन केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और संगठनात्मक प्रश्न भी खड़ा करता है। यह प्रश्न केवल किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि उन सभी संस्थाओं का है जिनकी पहचान व्यक्ति निर्माण, अनुशासन और मूल्य आधारित कार्यशैली से रही है।वो दौर भी था जब शाखा कार्यवाह से लेकर विभाग कार्यवाह तथा नगर प्रचारक से लेकर विभाग प्रचारक तक प्रत्येक पदाधिकारी अपने कार्यकर्ताओं का व्यक्तिगत रूप से ध्यान रखते थे। कार्यकर्ता केवल संख्या नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य माना जाता था। उसके सुख-दुःख, पारिवारिक परिस्थितियों, शिक्षा, रोजगार और व्यक्तिगत विकास तक की चिंता की जाती थी। यही आत्मीयता संघ की सबसे बड़ी शक्ति थी।उस समय कार्य करने वाले स्वयंसेवकों की सबसे बड़ी पहचान उनकी प्रामाणिकता, निस्वार्थ सेवा, अनुशासन और समर्पण थी। दायित्व पद प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वयं को समाज के लिए समर्पित करने का अवसर माना जाता था। शाखा केवल दैनिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि चरित्र निर्माण की ऐसी पाठशाला थी, जहाँ से निकलने वाला स्वयंसेवक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित करता था।समय के साथ संगठन का विस्तार हुआ, प्रभाव बढ़ा और उससे जुड़े लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ी । विस्तार स्वाभाविक और आवश्यक है, लेकिन जब संख्या गुणवत्ता पर भारी पड़ने लगे, तब आत्ममंथन की आवश्यकता होती है। यदि ऐसे लोग भी महत्वपूर्ण दायित्वों तक पहुँच जाएँ, जिनका संगठन की मूल कार्यपद्धति, संस्कार और विचारधारा से गहरा परिचय न हो, तो अनुभवी और समर्पित कार्यकर्ताओं में आत्मग्लानि वं निराशा स्वाभाविक है।आधुनिकता की अंधी दौड़, बदलती जीवनशैली और बढ़ती. औपचारिकता ने भी उस आत्मीय वातावरण को धीरे-धीरे कमजोर किया है। पहले प्रचारकों का पुराने स्वयंसेवकों के घरों पर नियमित आना-जाना होता था। संवाद, मार्गदर्शन और पारिवारिक संबंध संगठन की संस्कृति का हिस्सा थे। आज परिस्थितियाँ बदल गई हैं। संपर्क तो है, लेकिन वह आत्मीयता और व्यक्तिगत जुड़ाव पहले जैसा कम दिखाई देता है।यही कारण है कि कैलाश विजयवर्गीय का कथन केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्ममंथन का विषय है। किसी भी संगठन की वास्तविक शक्ति उसकी भीड़ नहीं, बल्कि उसके संस्कारित, प्रामाणिक और समर्पित कार्यकर्ता होते हैं। यदि व्यक्ति निर्माण की प्रक्रिया कमजोर होगी, तो संख्या बढ़ने के बावजूद संगठन की आत्मा कमजोर पड़ने लगेगी।आज आवश्यकता किसी व्यक्ति या पीढ़ी को दोष देने की नहीं, बल्कि उस मूल परंपरा को पुनर्जीवित करने की है जिसने संघ को समाज में विशिष्ट स्थान दिलाया। शाखा का उद्देश्य केवल उपस्थिति दर्ज कराना नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्वों का निर्माण करना है जो अपने आचरण, सेवा, विनम्रता और राष्ट्रभाव से समाज का मार्गदर्शन करें।भीड़ बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन यदि उस भीड़ में संस्कार, प्रामाणिकता और आत्मीयता का अनुपात घटने लगे, तो यह किसी भी संगठन के लिए चिंतन का विषय बन जाता है। आज आवश्यकता संख्या बढ़ाने से अधिक उस परंपरा को सशक्त करने की है, जिसने स्वयंसेवक को केवल कार्यकर्ता नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के लिए आदर्श नागरिक बनाया।

एक अपनापन आनौचारिक वार्तालाप ,सुख दुख में उपस्थिति उसे जोड़े रहती है।दैनंदिन शाखा संघ की केवल पद्धति नहीं है प्राण हैनियमित प्रवास ,संपर्क और संवाद इस संघ रूपी शरीर की…

एक बात तो है देश में भाजपा के विरुद्ध आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है

यकीन मानिए 2015 के आसपास मैंने वीडियो व लिखित भी पोस्ट की थी कि देश के चारों स्तंभ, न्यायपालिका कार्यपालिका विधायिका और मीडिया खत्म कर दिए गए।लेकिन मेरी बात का…

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