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Mystake : une expérience casino en ligne incontournable en 2024 दोस्तो अभी देश के पांच प्रदेशों में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं परिणाम भले ही 4 तारीख को आएं लेकिन जिस प्रकार से पोल सामने आये हैं उनको देखकर लगता है देश के विपक्षी नेता जो आज शीर्ष स्तर की राजनीती कर रहे हैं देश और देश की जनता को BJP RSS से आजादी नहीं दिला पाएंगे और जब तक देश की सत्ता में BJP रहेगी युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा महंगाई दिन पर दिन बढ़ती जाएगी घोटालों की जांच में भी घोटाले होंगे नेता और अधिकारी भ्रस्टाचार की सीमाओं को लाघते नजर आएंगेदोस्तो कल हमारे प्रधानमंत्री नें गंगा एक्सप्रेस का उद्धघाटन किया लेकिन यह विकास नहीं जनता को हमेशा हमेशा के लिए लूटने का व्यवसाय त्यार किया है जगह जगह टोल टैक्स और टोल टैक्स के लिए भी देश की जनता के करोड़ों रु. फास्टटैग के नाम पर एडवांस में लिए जाते हैंआज दुनिया की 300 यूनिवर्सिटी में एक भी भारत में नहीं हैलेकिन दुनिया के टॉप 10 मंदिरों में 8 भारत में हैं टॉप 10 मस्जिदों में 3 भारत में हैं क्या करेगा देश का युवादेश के नेता और साधू संत बलात्कारी होते जा रहे हैं डॉलर के मुकाबले रुपया दिन पर दिन कमजोर होता जा रहा हैदोस्तो अब देश की व्यवस्था देश के मौजूदा नेता ठीक नहीं कर सकतेदेश की व्यवस्था ठीक करने के लिए देश के नेताओं को देश की राजनीती से हटाना होगादोस्तो इसके लिए उ.प्र. के संभल कलेक्ट्रेट से कांग्रेस कार्यकर्ता PACL KBCL कल्पतरू सहारा प्रोग्रीम साईराम साइप्रसाद निमवस जैसी तमाम कम्पनियों के निवेशकों के लिए 17 अगस्त 26 को शुरू होगा मोदी सरकार के विरुद्ध आंदोलनदोस्तो देश की सम्पूर्ण व्यवस्था को बदलने के लिए जरूरी है देश के मौजूदा टॉप नेताओं को देश की राजनीती से बाहर करनाधन्यवादआपका अपना विनोद साथीजिला उपाध्यक्षसंभल कांग्रेस उ.प्र.जिला संयोजकठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवारसंभल8791674785 9720026990 wजय हिन्द जय भारत जय कांग्रेस छतरपुर जिले में वंशानुगत मछुआरों की बदहाल स्थिति: प्रकोष्ठों की सक्रियता पर उठे सवालगनेश रैकवार | छतरपुरछतरपुर जिले में वंशानुगत मछुआ समाज की स्थिति लगातार दयनीय होती जा रही है। तालाबों और जल संसाधनों पर कथित कब्जों के बीच समाज अपने हक और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन राजनीतिक दलों द्वारा बनाए गए मछुआ प्रकोष्ठों की भूमिका पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने निषाद एवं मछुआ समाज को संगठनात्मक रूप से जोड़ने के लिए प्रकोष्ठों का गठन किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी सक्रियता को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।जिले में भाजपा मछुआ प्रकोष्ठ के जिला संयोजक आशीष रैकवार तथा कांग्रेस की ओर से अरविंद रैकवार की नियुक्ति के बाद भी समाज के लोगों का आरोप है कि अब तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस बदलाव या प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।समाज के युवाओं का कहना है कि कई बार ज्ञापन, शिकायतें और आंदोलन के बावजूद न तो तालाबों पर कथित अवैध कब्जों की स्थिति में सुधार हुआ और न ही समितियों की पारदर्शी जांच आगे बढ़ पाई। इससे युवाओं में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।इधर, राजनीतिक स्तर पर मछुआ कल्याण बोर्ड अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष जैसे पदों में बदलाव के बावजूद जिला स्तर पर नेतृत्व को लेकर असंतोष बना हुआ है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इस बार योग्य और जमीनी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी मिलेगी या फिर व्यवस्था केवल सिफारिशों पर ही चलती रहेगी?इसी बीच “ऑल इंडिया फिशरमैन कांग्रेस” की सक्रियता को लेकर भी जिले में चर्चाएं तेज हैं। कई लोग इसे लगभग निष्क्रिय बताते हुए इसे “कागजी संगठन” तक सीमित मान रहे हैं।युवा रैकवार समाज का कहना है कि पिछले महीनों में दिए गए ज्ञापनों पर भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जिससे राजनीतिक दलों और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि बड़े नेताओं की चुप्पी ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।समाज का कहना है कि वर्षों से चल रही हक की लड़ाई आज भी वहीं की वहीं खड़ी है, जबकि तालाबों और समितियों में कथित अनियमितताओं और कब्जों के मामलों की जांच की मांग लगातार की जा रही है।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व इस बढ़ते असंतोष को कैसे संबोधित करता है और क्या वाकई जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव देखने को मिलेगा या नहीं।— आगे के अंक में: किस समिति में सबसे बड़े फर्जीवाड़े के आरोप, पूरी रिपोर्ट जय निषाद राज जय डा जोगेंद्र नाथ मंडलजय झलकारी बाईं कोली जय फूलन जय सम्राट अशोक जय भारत जय निषाद सभ्यता* सभी पत्रकार साथी व liu से जुड़े सभी साथियों से निवेदन करता हूं

जिलाधिकारी के निर्देशन में पाली गांव में विशेष स्वच्छता अभियान का आयोजन

जिलाधिकारी ने स्वयं लिया जायजा, संबंधित अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश बागपत दिनांक 18 अगस्त 2025 — जिलाधिकारी अस्मिता लाल के निर्देशन में पाली गांव में शुक्रवार को व्यापक स्वच्छता…

जिलाधिकारी की पहल पर ‘रेबीज मुक्त बागपत’ अभियान का शुभारंभ, अब बेजुबान जानवरों को मिलेगा जीवनरक्षक टीका

जनपद के सभी 33 पशु चिकित्सालयों पर लगे विशेष कैंप में पालतू जानवरों का होगा एंटी रेबीज टीकाकरण बागपत, 18 अगस्त 2025 — जिलाधिकारी अस्मिता लाल के निर्देशन एवं पहल…

कश्यप निषाद मांझी समाज के गौरव परम श्रद्धेय द माउंटेन मैन दशरथ मांझी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन विनम्र श्रद्धांजलिदशरथ मांझी जी सा ज़िद्दी कठोर और संघर्षशील आदमी की धरती पर आज तक पैदा नहीं उसने अपने 22 साल की कठोर मेहनत के दम पर एक एक पत्थर को छैनी से तोड़कर गांव वालों के लिए रास्ता बनाएं था ज्ञात हो कि दशरथ मांझी जी की पत्नी बहुत बीमार हो गईतीज आस पास कोई अस्पताल नहीं था तथा अस्पताल में ले जाने के लिए बहुत दूर से होकर जाना पड़ता था दशरथ मांझी जब अपनी पत्नी को अस्पताल ले जाने लगे तो क रास्ते में ही मौत हो गई इससे उन्हें बहुत दुख हुआ तब उन्होंने प्रण लिया कि आगे भविष्य में कोई भी आदमी दूर अस्पताल पहुंचने के कारण नहीं मरेगा तब उन्होंने अपने 22 साल की कठोर मेहनत से गांव वालों के लिए पत्थर का सीना चीरकर रास्ता बनाया था आज दशरथ मांझी जी पूरे देश में पर्वत पुरुष यानी माउंटेन मैन के नाम से जाने जाते हैं ऐसी दिवंगत आत्मा के चरणो में कोटि-कोटि नमन 🙏💐🌹💫

कश्यप निषाद मांझी समाज के गौरव परम श्रद्धेय द माउंटेन मैन दशरथ मांझी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन विनम्र श्रद्धांजलिदशरथ मांझी जी सा ज़िद्दी कठोर और संघर्षशील…

बागपत, 16 अगस्त 2025 –कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आज जनपद की गौशालाओं में विधि-विधानपूर्वक गौ पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गौमाता की आरती उतारी, पुष्प अर्पित किए तथा परंपरागत रूप से पूजा-अर्चना कर गौसेवा का संकल्प लिया।

बागपत, 16 अगस्त 2025 –कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आज जनपद की गौशालाओं में विधि-विधानपूर्वक गौ पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गौमाता की आरती…

जिलाधिकारी की पहल पर बेजुबान जानवरों को मिलेगी रेबीज से राहत, जनपद में शुरू होगा व्यापक अभियान

जनपद के सभी पशु चिकित्सालयों पर रेबीज की रोकथाम के लिए चलेगा जानवरों का टीकाकरण कैंप रेबीज उन्मूलन के लिए विशेष अभियान 18 अगस्त से होगा शुरू, कुत्ते, श्वान आदि…

2025 में Java, MERN और MEAN स्टैक का बाज़ार और ट्रेंड

Java, MERN और MEAN स्टैक: 2025 में बाज़ार का हाल वेब डेवेलपमेंट और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में तीन प्रमुख तकनीकी स्टैक्स—Java Full Stack, MERN और MEAN—आजकल बेहद चर्चा में हैं। इनका…

तीन दिन की जंग के बाद टूटा प्रशासन का घमंड, शिक्षक अपमान कांड में दर्ज हुआ मुकदमा

श्यामलाल निषाद की रणनीति ने तोड़ी पुलिस की चुप्पी, FIR दर्ज, वीडियो से होगी पहचान Viral सुलतानपुर। जिले के धनपतगंज थानाक्षेत्र के समरथपुर के बेसिक शिक्षक ओम प्रकाश का अपमान…

AI के युग में खतरे में पड़े कौशल और भविष्य में कैसे बनाएं अपनी जगह

AI की वजह से कौन-कौन से कौशल खतरे में हैं और हमें क्या करना चाहिए? हाल के वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हमारी दुनिया में क्रांति ला दी है।…

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छतरपुर जिले में वंशानुगत मछुआरों की बदहाल स्थिति: प्रकोष्ठों की सक्रियता पर उठे सवालगनेश रैकवार | छतरपुरछतरपुर जिले में वंशानुगत मछुआ समाज की स्थिति लगातार दयनीय होती जा रही है। तालाबों और जल संसाधनों पर कथित कब्जों के बीच समाज अपने हक और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन राजनीतिक दलों द्वारा बनाए गए मछुआ प्रकोष्ठों की भूमिका पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने निषाद एवं मछुआ समाज को संगठनात्मक रूप से जोड़ने के लिए प्रकोष्ठों का गठन किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी सक्रियता को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।जिले में भाजपा मछुआ प्रकोष्ठ के जिला संयोजक आशीष रैकवार तथा कांग्रेस की ओर से अरविंद रैकवार की नियुक्ति के बाद भी समाज के लोगों का आरोप है कि अब तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस बदलाव या प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।समाज के युवाओं का कहना है कि कई बार ज्ञापन, शिकायतें और आंदोलन के बावजूद न तो तालाबों पर कथित अवैध कब्जों की स्थिति में सुधार हुआ और न ही समितियों की पारदर्शी जांच आगे बढ़ पाई। इससे युवाओं में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।इधर, राजनीतिक स्तर पर मछुआ कल्याण बोर्ड अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष जैसे पदों में बदलाव के बावजूद जिला स्तर पर नेतृत्व को लेकर असंतोष बना हुआ है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इस बार योग्य और जमीनी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी मिलेगी या फिर व्यवस्था केवल सिफारिशों पर ही चलती रहेगी?इसी बीच “ऑल इंडिया फिशरमैन कांग्रेस” की सक्रियता को लेकर भी जिले में चर्चाएं तेज हैं। कई लोग इसे लगभग निष्क्रिय बताते हुए इसे “कागजी संगठन” तक सीमित मान रहे हैं।युवा रैकवार समाज का कहना है कि पिछले महीनों में दिए गए ज्ञापनों पर भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जिससे राजनीतिक दलों और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि बड़े नेताओं की चुप्पी ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।समाज का कहना है कि वर्षों से चल रही हक की लड़ाई आज भी वहीं की वहीं खड़ी है, जबकि तालाबों और समितियों में कथित अनियमितताओं और कब्जों के मामलों की जांच की मांग लगातार की जा रही है।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व इस बढ़ते असंतोष को कैसे संबोधित करता है और क्या वाकई जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव देखने को मिलेगा या नहीं।— आगे के अंक में: किस समिति में सबसे बड़े फर्जीवाड़े के आरोप, पूरी रिपोर्ट

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