Spread the love

विभाजन की विभीषिका के चित्रों ने बागपत में कुरेदीं पुरानी यादें, आंखें हुईं नम; 52 पोस्टरों में दिखी बंटवारे की दर्दनाक कहानी

विकास भवन में लगी विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस प्रदर्शनी, जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने किया शुभारंभ

बंटवारे में विस्थापित परिवार से सुदर्शना गिरोत्रा ने सुनाई दर्द और संघर्ष की दास्तान, दो मिनट का मौन किया धारण

बागपत 14 अगस्त 2026 —

तारीख थी 14 अगस्त 1947… देश आजादी की दहलीज पर था, लेकिन इसी के साथ भारतीय इतिहास के सबसे पीड़ादायक अध्यायों में से एक की शुरुआत हुई। भारत का विभाजन केवल नक्शे पर खींची गई एक लकीर नहीं था, बल्कि इसने लाखों परिवारों के घर, रिश्ते, रोजगार और जीवन की दिशा बदल दी। नफरत और हिंसा के बीच असंख्य लोगों को अपना घर-बार छोड़कर अनजान रास्तों पर निकलना पड़ा। किसी ने अपनों को खोया तो किसी ने पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी पीछे छोड़ दी।

इसी दर्दनाक इतिहास को याद करने और नई पीढ़ी को उससे परिचित कराने के लिए आज बागपत में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया गया। प्रदर्शनी देखने पहुंचे लोग तस्वीरों को देर तक निहारते रहे और 1947 की त्रासदी की स्मृतियों में खो गए। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग बागपत की ओर से आयोजित प्रदर्शनी ने इतिहास के इसी दर्दनाक अध्याय को वर्तमान पीढ़ी के सामने जीवंत कर दिया। एक-एक चित्र उस दौर की कहानी कहता नजर आया। प्रदर्शनी देखने पहुंचे अधिकारी और आमजन विभाजन की त्रासदी से जुड़े चित्रों को देखते हुए भावुक नजर आए।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने प्रदर्शनी का शुभारंभ करने के बाद पूरे सभागार का अवलोकन किया। उन्होंने विभाजन से संबंधित प्रत्येक पोस्टर को देखा और उसके माध्यम से प्रस्तुत संदेश की जानकारी ली। प्रदर्शनी में जिस सूक्ष्मता से घटनाओं और मानवीय पीड़ा को चित्रों में उकेरा गया था, डीएम ने उसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि विभाजन भारतीय इतिहास की अत्यंत बड़ी त्रासदी थी। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपने स्वजन खोए और लाखों लोगों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ा। विभाजन किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि इससे नई समस्याएं जन्म लेती हैं। इसलिए समाज को एकता, संगठन, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

विकास भवन में लगी प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण 52 पृष्ठों के विस्तृत पोस्टर रहे। इनमें विभाजन के समय की घटनाओं, विस्थापित लोगों की स्थिति और उस दौर के सामाजिक माहौल को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। तस्वीरों में नजर आती भीड़, अपना सामान समेटकर घर छोड़ते परिवार और अनिश्चित भविष्य की ओर बढ़ते लोग उस दौर की भयावहता का एहसास कराते नजर आए। प्रदर्शनी का उद्देश्य विभाजन की पीड़ा से सीख लेकर आने वाली पीढ़ियों को नफरत और हिंसा के दुष्परिणामों के प्रति सचेत करना रहा। अधिकारियों के साथ जनसामान्य ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। लोगों ने पोस्टरों में दिखाई गई घटनाओं को ध्यान से देखा और विभाजन के दौरान अपने पूर्वजों द्वारा झेली गई परिस्थितियों को याद किया।

कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण उस समय आया, जब विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए परिवार की सदस्य और वर्तमान में बड़ौत निवासी सुदर्शना गिरोत्रा को सम्मानित किया गया। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर और जीवन का प्रतीक पौधा भेंट कर सम्मान दिया। सुदर्शना गिरोत्रा पत्नी स्वर्गीय मूलक राज गिरोत्रा हैं। उन्होंने कार्यक्रम में विभाजन के समय अपने परिवार द्वारा झेली गई परिस्थितियों को साझा किया। उनकी बातें सुनकर सभागार में मौजूद लोग उस दौर की पीड़ा को महसूस करते नजर आए। उन्होंने बताया कि विभाजन के दौरान उनके माता-पिता और सास-ससुर ने अत्यधिक मारपीट, अन्याय और भय का सामना किया। हालात इतने खराब थे कि परिवार को जान बचाकर अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। भारत पहुंचते समय उनके पास न अपना घर था और न ही भविष्य की कोई निश्चितता। जो कुछ था, वह पीछे छूट चुका था।

सुदर्शना गिरोत्रा ने बताया कि भारत आने के बाद परिवार ने पहले हरियाणा में शरण ली। इसके बाद बड़ौत पहुंचे और यहीं नए सिरे से जीवन शुरू किया। परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजी-रोटी और सम्मान के साथ जीवन खड़ा करने की थी। उन्होंने बताया कि परिवार के लोगों ने कोई भी काम छोटा नहीं समझा। जो काम मिला, उसे किया और मेहनत करते हुए धीरे-धीरे अपने पैरों पर खड़े हुए। उनके साथ उस समय भारत आए अनेक परिवारों ने भी इसी तरह संघर्ष किया। विस्थापन की पीड़ा के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और मेहनत को अपनी ताकत बनाया।

आज उन्हीं परिवारों की कई पीढ़ियां उत्तर प्रदेश में अच्छी तरह स्थापित हैं। सुदर्शना ने कहा कि समय बीत गया, जीवन आगे बढ़ गया, लेकिन मूल स्थान की यादें आज भी मन में हैं। उन यादों के साथ वह दौर भी सामने आ जाता है, जब जीवन चलाने के लिए गाड़ियों में पानी तक बेचना पड़ा था। उन्होंने भावुक होकर कहा कि आज परिवार की उस पीड़ा को याद करते हुए सम्मान मिलना उनके लिए विशेष अनुभव है। उन्होंने जिलाधिकारी और प्रशासन का आभार जताया।

सुदर्शना गिरोत्रा के बेटे राजीव ग्रोहत्रा ने भी परिवार की विभाजन यात्रा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनके परिवार का संबंध पाकिस्तान के झांग जिले के एक गांव से था। विभाजन की परिस्थितियां बिगड़ने के बाद परिवार को अपना घर और सब कुछ छोड़कर भारत आना पड़ा। उन्होंने बताया कि भारत पहुंचने के बाद परिवार ने शून्य से शुरुआत की। विस्थापन के साथ आई कठिनाइयों के बीच मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास को सहारा बनाया गया। परिवार ने समय के साथ अपने लिए नया मुकाम बनाया।

कार्यक्रम के दौरान विभाजन की हिंसा में बलिदान देने वाले लोगों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा गया। अधिकारियों और उपस्थित लोगों ने मौन धारण कर उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाए अथवा अपनों को खोया। इस अवसर पर बताया गया कि 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का उद्देश्य विभाजन के दुखद अध्याय को याद करना और उसके दुष्परिणामों से वर्तमान तथा भावी पीढ़ियों को अवगत कराना है। यह दिवस समाज में एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदना के महत्व को रेखांकित करता है।

कार्यक्रम में विभाजन के व्यापक प्रभाव को लेकर यह संदेश भी सामने आया कि 1947 का बंटवारा केवल दो देशों के निर्माण तक सीमित घटना नहीं थी। इसने करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया। परिवार बिछड़े, लोगों को अपनी जड़ों से दूर होना पड़ा और लाखों लोगों को नए स्थानों पर फिर से जीवन खड़ा करना पड़ा। बागपत में आयोजित प्रदर्शनी ने इसी मानवीय पक्ष को प्रमुखता से सामने रखा। तस्वीरों और दस्तावेजों के जरिए बताया गया कि इतिहास की घटनाओं का प्रभाव आम लोगों के जीवन पर किस तरह पड़ता है। विभाजन की त्रासदी की स्मृति आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती है कि सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं। नफरत और हिंसा का परिणाम अंततः आम लोगों को ही भुगतना पड़ता है।

कार्यक्रम के दौरान सुदर्शना गिरोत्रा ने बागपत के पुरा महादेव में आयोजित जीरो वेस्ट महोत्सव की भी सराहना की एवं स्नेहिल वातावरण में जिलाधिकारी को सम्मानित कर आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन माध्यमिक शिक्षा समन्वयक एवं शिक्षाविद डॉ. सत्यवीर सिंह ने किया। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक राहुल वर्मा जिला सूचना अधिकारी राहुल भाटी, जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार यादव, समेत अन्य विभागीय अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

सूचना विभाग बागपत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

संभल में स्कूल का छज्जा गिरा, एक बच्चे की मौत, स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान हादसा, दो बच्चे घायल, स्कूल परिसर चीख-पुकार मच गई!संभल में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान एक निजी स्कूल के मुख्य गेट का छज्जा गिरने से एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। एसडीएम विकास चंद्र, सीओ असमोली अमन सिंह और थाना प्रभारी सुधीर पंवार तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। इसके बाद सुबह 11:25 बजे डीएम अंकित खंडेलवाल, एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई और बीएसए अलका शर्मा भी मौके पर पहुंचे।यह घटना शनिवार सुबह करीब 10 बजे संभल तहसील के थाना असमोली क्षेत्र के मदाला फतेहपुर गांव में स्थित अल हसनैन पब्लिक स्कूल में हुई। स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान स्कूल के मुख्य द्वार पर बना छज्जा अचानक ढह गया। हादसे में छह वर्षीय निजामम पुत्र नईम की मौत हो गई। घायल बच्चों की पहचान सातवीं कक्षा के 11 वर्षीय सैफ अली पुत्र साबुन और पांचवीं कक्षा के 10 वर्षीय शैदाना पुत्र इमरान के रूप में हुई है।

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

×