बागपत के एक संकल्प से जुड़ेगा देश.. पुरा महादेव से शुरू हुई भक्ति और आस्था की नई परिभाषा
जिलाधिकारी की अभिनव सोच का परिणाम: बागपत ने मेले में जो करके दिखाया, अब देश उसे संकल्प में बदलेगा..
जिस प्रकृति को भारतीय सनातन संस्कृति ने माना पूज्य, उसकी रक्षा को भक्ति से जोड़ रहा बागपत
बागपत, 9 अगस्त 2026। हर-हर महादेव के जयघोष के बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख आस्था केंद्र श्री परशुरामेश्वर पुरा महादेव मंदिर से निकला एक संदेश अब देशभर तक पहुंचेगा। यहां जिलाधिकारी अस्मिता लाल की पहल और नेतृत्व में विकसित किए गए ‘जीरो वेस्ट महोत्सव’ के मॉडल से निकली सोच अब राष्ट्रीय जनभागीदारी का हिस्सा बन गई है। भारत सरकार के माय गवर्नमेंट (MyGov) प्लेटफॉर्म पर ‘भक्ति भी, प्रकृति भी–जिम्मेदार श्रद्धा का राष्ट्रीय संकल्प’ शुरू किया गया है। श्रावणी कांवड़ मेले के पहले दिन शुरू हुई इस पहल में देशभर के नागरिक धार्मिक स्थलों की स्वच्छता, प्रकृति संरक्षण और जिम्मेदार आचरण को अपनी आस्था का हिस्सा बनाने का संकल्प ले सकेंगे। संकल्प लेने वाले नागरिकों को डिजिटल प्रमाणपत्र भी मिलेगा।
संकल्प लेने के लिए लिंक:
https://pledge.mygov.in/bhakti-bhi-prakriti-bhi/
हमारे पर्व और त्योहार प्राचीन समय से खुशहाली, समृद्धि और आनंद के प्रतीक रहे हैं और भगवान शिव को प्रकृति के अधिपति और आराध्य के रूप में पूजा जाता है। इसी भाव को आज की पर्यावरणीय जरूरत से जोड़ते हुए बागपत ने शिवरात्रि कांवड़ मेले को ‘जीरो वेस्ट महोत्सव’ के रूप में आयोजित कर एक नई पहल की शुरुआत की थी। खास बात यह रही कि पर्यावरण संरक्षण को मेले से अलग अभियान नहीं बनाया गया, बल्कि आस्था की व्यवस्थाओं का ही हिस्सा बनाया गया। स्वच्छता, जनभागीदारी, संसाधनों का पुनः उपयोग और जिम्मेदार व्यवहार—सब एक साथ दिखाई दिए। बागपत ने मेले में जो करके दिखाया, अब उसी सोच को नागरिक संकल्प के रूप में देश तक पहुंचाने की पहल हुई है।
फाल्गुनी महाशिवरात्रि में पहली बार आयोजित जीरो वेस्ट महोत्सव ने कचरे को संसाधन में बदलकर कई लोगों के जीवन में खुशहाली और आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई थी। जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में पुरा महादेव में किए गए प्रयोगों में खराब चप्पलों से आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों के बैठने के लिए मैट और आकर्षक सेल्फी प्वाइंट तैयार किए गए, वहीं प्लास्टिक बोतलों से निकले महीन रेशों से बागपत की अपनी गुड़िया ‘नन्ही कली’ बनाई गई। पूजा में चढ़े फूलों को सोलर ड्रायर से सुखाकर अगरबत्ती तैयार की गई, जबकि कलावों से राखी और दूध-शहद के मिश्रण से साबुन जैसे प्रयोगों ने पूजा सामग्री और अपशिष्ट के पुनः उपयोग की नई संभावनाएं दिखाईं। बोतलों के ढक्कनों और खराब चप्पलों से बने सेल्फी प्वाइंट जहां लोगों के आकर्षण का केंद्र बने, वहीं इन प्रयोगों ने यह संदेश भी दिया कि श्रद्धा से निकलने वाली सामग्री और मेले का कचरा बोझ नहीं, रोजगार, उपयोगी उत्पाद और खुशियों का संसाधन भी बन सकता है। यही सफल प्रयोग अब श्रावणी मेले में आगे बढ़ रहे ‘जीरो वेस्ट महोत्सव’ और राष्ट्रीय ‘भक्ति भी, प्रकृति भी’ संकल्प की मजबूत आधारभूमि बना है।
इस राष्ट्रीय संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने की डिजिटल पहल को आकार देने में सूचना विभाग, बागपत के साथ माय भारत स्वयंसेवक अमन कुमार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। वहीं इसे कांवड़ यात्रा एप से भी जोड़ा गया है।
जीरो वेस्ट महोत्सव केवल एक दिन की व्यवस्था नहीं रहा, बल्कि आस्था के आयोजन को देखने का एक नया नजरिया बनकर सामने आया। अब इसी अनुभव की अगली कड़ी के रूप में नागरिकों को स्वयं ‘भक्ति भी, प्रकृति भी… आस्था भी, जिम्मेदारी भी’ का संकल्प लेने का अवसर मिल रहा है। बागपत के लिए यह एक बड़े अभियान की शुरुआत है। पुरा महादेव में स्थानीय स्तर पर तैयार हुआ जीवंत मॉडल अब माय गवर्नमेंट के राष्ट्रीय मंच तक पहुंचा है। इसके जरिए मेले में दिखाई दी जिम्मेदार आस्था की सोच अब देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले श्रद्धालुओं, परिवारों और समुदायों तक पहुंचने की राह पर है।
संकल्प पूरा करने के बाद मिलने वाला डिजिटल प्रमाणपत्र इस विचार को आगे ले जाने का माध्यम भी बनेगा। नागरिक इसे परिवार, मित्रों और समुदाय के साथ साझा कर सकते हैं। सोशल मीडिया पर संकल्प और अनुभव साझा होने से एक व्यक्ति की पहल दूसरे तक पहुंचने की कड़ी बनेगी। #BhaktiBhiPrakritiBhi, #ResponsibleDevotion, #MissionLiFE, #SwachhBharat और #ZeroWasteMahotsav के माध्यम से इस संदेश को और व्यापक बनाने की दिशा में प्रयास है।
इस पहल की खासियत यह भी है कि यह भारतीय परंपरा और आज की पर्यावरणीय जरूरत को एक ही सूत्र में पिरोती है। सनातन परंपरा में नदियां, पर्वत, वृक्ष, धरती और प्रकृति पूज्य रहे हैं। बागपत का संदेश इसी भाव को व्यवहार में उतारने का है—प्रकृति की रक्षा भक्ति से अलग कोई अतिरिक्त काम नहीं, बल्कि जिम्मेदार आस्था का ही हिस्सा है। इसी सोच से ‘भक्ति भी, प्रकृति भी’ की अवधारणा को आगे बढ़ाया जा रहा है। यही सोच विकसित भारत @2047 की प्राथमिकताओं में शामिल स्वच्छ भारत मिशन और मिशन लाइफ की भावना से भी जुड़ती है। स्वच्छता, जिम्मेदार उपभोग, संसाधनों का संरक्षण और व्यवहार परिवर्तन जैसे विषयों को धार्मिक आस्था के बड़े जनसमूह से जोड़कर नागरिक भागीदारी को केंद्र में रखा गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छता से जनभागीदारी, जनभागीदारी से जनआंदोलन’ के विजन को बागपत ने आस्था के मंच से नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से प्रदेश में धार्मिक आयोजनों को स्वच्छ, सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-केंद्रित बनाने की मुहिम के बीच पुरा महादेव का जीरो वेस्ट महोत्सव एक कदम आगे बढ़कर यह दिखा रहा है कि आस्था और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं। बागपत ने मेले में इसे करके दिखाया और अब उसी जीवंत प्रयोग से निकली ‘भक्ति भी, प्रकृति भी… आस्था भी, जिम्मेदारी भी’ की सोच राष्ट्रीय संकल्प के रूप में देश तक पहुंच रही है—यानी एक जिले की पहल, अब जनभागीदारी के बड़े अभियान की ओर।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इस ऐतिहासिक शिवधाम में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में पुरा महादेव से निकला संदेश केवल बागपत की सीमा तक सीमित रहने वाला नहीं है। अब राष्ट्रीय संकल्प देशभर के नागरिकों को इस मॉडल को देखने, समझने और उससे प्रेरणा लेने का निमंत्रण भी देता है। MyGov पर संकल्प लिया जा सकता है, लेकिन इसकी असली तस्वीर पुरा महादेव में ही देखी जा सकती है—जहां आस्था का उत्सव प्रकृति की कीमत पर नहीं, प्रकृति के साथ मनाने की कोशिश दिखाई दे रही है।
यही वजह है कि पुरा महादेव अब केवल एक धार्मिक आयोजन का स्थल नहीं, बल्कि ‘जिम्मेदार आस्था’ के प्रयोग को देखने और समझने का जीवंत उदाहरण भी बन रहा है। यहां आने वाला श्रद्धालु देख सकता है कि सिंगल यूज प्लास्टिक से बचाव, कचरा प्रबंधन, पूजा सामग्री का जिम्मेदार उपयोग, जल संरक्षण और जनभागीदारी जैसे छोटे-छोटे कदम मिलकर धार्मिक आयोजन की पूरी सोच को कैसे बदल सकते हैं।
इस पहल की सबसे बड़ी ताकत यह है कि बदलाव की जिम्मेदारी केवल प्रशासन तक सीमित नहीं रहती। श्रद्धालु, दुकानदार, मंदिर प्रबंधन, स्वयंसेवक और स्थानीय समुदाय इसके भागीदार हैं। पुरा महादेव में प्रशासन ने जिस सोच को जमीन पर उतारा, MyGov का संकल्प उसी सोच को नागरिक के हाथ में सौंपने का अगला कदम है।
आज बागपत का एक मंदिर और एक जिला इस सोच की शुरुआत कर रहा है। आगे लाखों-करोड़ों नागरिक इससे जुड़ें, अपने-अपने धार्मिक स्थलों तक इसका संदेश ले जाएं और जिम्मेदार आस्था को व्यवहार का हिस्सा बनाएं—इसी जनभागीदारी की संभावना के साथ यह पहल आगे बढ़ रही है। एक जनपद में शुरू हुआ प्रयोग अब जन-जन की भागीदारी से बड़े अभियान का रूप लेने की दिशा में है।
और इस पूरी पहल का सबसे सीधा सवाल भी यही है—भगवान को क्या अर्पित किया, यह जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही यह भी कि दर्शन के बाद प्रकृति और समाज के लिए क्या बचाया, क्या संवारा और क्या छोड़ा।
‘भक्ति भी, प्रकृति भी… आस्था भी, जिम्मेदारी भी’—पुरा महादेव से निकला यही संदेश अब राष्ट्रीय संकल्प बनकर देश के नागरिकों तक पहुंच रहा है।
सूचना विभाग, बागपत