धन कमाने की होड़ में परिवारों से संस्कारों का विलुप्त होना ही आज की पीढ़ी सामाजिक मूल्यों को भूल गई है। अपने कर्तव्य भूल गई है। केवल अधिकार याद हैं संपत्ति पाने के लिए। माता-पिता यदि असमर्थ है तो संतान का दायित्व उनको संबल देना है या तो सारा ही कार्य उल्टा है वृद्ध आश्रम में पिता और माता की मृत्यु और बेटियों का विमुख होना पराकाष्ठा है निष्ठुरता की औलाद यह भूल जाती है कि हमें भी बुजुर्ग होना है और जो आज हम अपने माता-पिता के साथ कर रहे हैं कल को हमारे बच्चे ब्याज सहित हमें चुकता करेंगे।🙏🏻 अभिमन्यु गुप्ता जिला अध्यक्ष उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल बागपत