जब भी कश्यप समाज से जुड़ी कोई गंभीर घटना या अन्याय सामने आता है, तब समाज के कुछ तथाकथित नेता न तो घटनास्थल पर दिखाई देते हैं और न ही उनके सोशल मीडिया पर उस विषय पर एक शब्द देखने को मिलता है।
प्रश्न यह है कि यह मौन किसलिए है?
क्या समाज के मुद्दों पर बोलना उन्हें हानिकारक लगता है?
क्या समाज का दर्द उनके लिए महत्वहीन है?
या फिर उन्हें अपनी छवि और निजी स्वार्थ, समाज के सम्मान से अधिक प्रिय हैं?
विडंबना यह है कि कई बार उनके अपने ही जिले या क्षेत्र में समाज के लोगों के साथ गंभीर घटनाएँ हो जाती हैं, मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएं हो रही है। फिर भी वे चुप्पी साधे रहते हैं। समाज यह अपेक्षा करता है कि जो स्वयं को नेता कहते हैं, वे कठिन समय में आगे आएँ, पीड़ितों के साथ खड़े हों और न्याय की आवाज़ बुलंद करें।
नेतृत्व केवल मंचों पर भाषण देने, भोजों में शामिल होने, शादियों, तेरहवीं, दावतों और मेल-मिलाप तक सीमित नहीं होता। नेतृत्व का असली अर्थ है—समाज के सुख-दुख में साथ खड़ा होना और अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना।
यदि समाज का व्यक्ति संकट में हो और नेता केवल अपनी व्यस्तताओं, निजी लाभ या सामाजिक दिखावे में लगे रहें, तो समाज उनसे प्रश्न अवश्य करेगा। सम्मान पद या उपाधि से नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व और कार्यों से मिलता है।
समाज के नाम पर मंचों की कमी नहीं,
लेकिन समाज के दर्द पर बोलने वाले कहाँ हैं?
जब समाज पर अन्याय होता है… जब किसी परिवार पर संकट आता है… जब न्याय की लड़ाई लड़ने की ज़रूरत होती है…
तब कई तथाकथित नेता न घटनास्थल पर दिखाई देते हैं, न उनके सोशल मीडिया पर एक शब्द मिलता है।
लेकिन… 🍽️ दावतों में सबसे आगे, 🎉 शादी-विवाह में सबसे आगे, 🌳 आम की पार्टी में सबसे आगे, 📸 फोटो खिंचवाने में सबसे आगे।
समाज के मुद्दों पर — शून्य।
नेतृत्व का अर्थ केवल मालाएँ पहनना, मंच साझा करना और बड़े-बड़े पद लिख लेना नहीं है।
नेतृत्व का अर्थ है—अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना, पीड़ित के साथ खड़ा होना और समाज की आवाज़ बनना।
याद रखिए— समाज केवल नाम नहीं, काम याद रखता है।
सम्मान पद से नहीं, संघर्ष से मिलता है।
कश्यप समाज को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो संकट के समय सबसे आगे खड़ा हो, न कि केवल उत्सवों में दिखाई दे।
जैसे बंदर एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर लगातार छलांग लगाता रहता है, बहुत सक्रिय दिखाई देता है, लेकिन कोई सार्थक निर्माण नहीं करता; उसी प्रकार केवल इधर-उधर उपस्थित रहने से नेतृत्व सिद्ध नहीं होता। वास्तविक नेतृत्व वह है जो समाज के मुद्दों पर स्पष्ट, साहसी और जिम्मेदार भूमिका निभाए।
AKS