जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में हो रहे जनहित कार्यों से प्रेरित विकास विभाग के कर्मचारियों का अनूठा संकल्प

बागपत 05 अगस्त 2026– कांवड़ यात्रा में आमतौर पर श्रद्धालु भगवान शिव का नाम, अपने गांव या परिवार की मंगलकामना लेकर चलते हैं। लेकिन इस बार हरिद्वार से बागपत की ओर बढ़ रही एक कांवड़ ने लोगों का ध्यान इसलिए खींचा, क्योंकि उस पर लिखा था—”सुशासन बागपत”। कांवड़ पर भगवान शिव के चित्र के साथ जिलाधिकारी अस्मिता लाल का चित्र, बागपत की पहचान श्री परशुरामेश्वर पुरा महादेव का स्वरूप और जनपद के विकास का संदेश अंकित था। इसे लेकर चल रहे विकास विभाग के दो कर्मचारियों का कहना था कि यह कांवड बागपत में जनसेवा, सुशासन और विकास के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लौट रहे जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के कार्मिक रवि जैसवाल और सहकारिता विभाग के सचिव रजनीश पँवार, दोनों स्वयं शिवभक्त हैं। उनका कहना है कि जनपद में विकास कार्यों, नवाचारों और जनहित आधारित प्रशासनिक पहलों से प्रेरित होकर उन्होंने इस बार अपनी श्रद्धा को “सुशासन” के संदेश से जोड़ने का निर्णय लिया। उनके अनुसार भगवान शिव की आराधना केवल मंदिर तक सीमित नहीं, बल्कि समाज की सेवा, ईमानदारी से दायित्व निभाना और जनकल्याण के लिए कार्य करना भी उसी भावना का विस्तार है।
हरिद्वार में हजारों कांवड़ियों के बीच यह कांवड़ अलग दिखाई दे रही थी। रास्ते में कई श्रद्धालु रुककर इसके बारे में पूछते रहे कि आखिर “सुशासन बागपत” का संदेश क्यों लिखा गया है। कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि यह किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि उस सोच का सम्मान है जिसमें जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में विकास, पारदर्शिता, जनसहभागिता और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
सुशासन को बनाया श्रद्धा का संदेश
श्रावण मास की कांवड़ यात्रा को भारत की सबसे बड़ी आस्था यात्राओं में माना जाता है। करोड़ों श्रद्धालु सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर गंगाजल लाते हैं। इस यात्रा में श्रद्धा के साथ सामाजिक संदेश देने की परंपरा भी समय-समय पर देखने को मिलती रही है। कहीं बेटी बचाओ का संदेश दिखाई देता है तो कहीं पर्यावरण संरक्षण का। बागपत के इन कर्मचारियों ने इस बार सुशासन और विकास को अपनी श्रद्धा से जोड़कर एक अलग संदेश देने का प्रयास किया।
पिछले कुछ वर्षों में बागपत प्रशासन ने जीरो वेस्ट महोत्सव, डिजिटल कांवड़ यात्रा ऐप, ‘भक्ति भी • प्रकृति भी’ जैसे अनेक जनभागीदारी आधारित नवाचारों के माध्यम से विकास और सुशासन को नई पहचान देने का प्रयास किया है। विकास विभाग के कर्मचारियों का मानना है कि जब सकारात्मक बदलाव दिखाई देते हैं तो उनका प्रभाव केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के बीच भी प्रेरणा बनता है। यही कारण है कि उन्होंने अपनी कांवड़ को भी जनपद की इसी सकारात्मक पहचान से जोड़ने का निर्णय लिया।
दोनों ही कर्मचारियों का कहना है कि कांवड़ यात्रा ने उन्हें यह अनुभव कराया कि भगवान शिव का संदेश केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना, अपने कार्य को ईमानदारी से करना और विकास में योगदान देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार यदि हर व्यक्ति अपने दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाए तो वही सुशासन की सबसे मजबूत नींव बन सकता है।
सूचना विभाग बागपत