क्या कश्यप समाज या कश्यप समाज की महिलाएं हिंदू नहीं है क्या यह मुसलमान है ये मोब लिंचिंग को बढ़ावा दे रही है इनका एनकाउंटर होना चाहिए जो हिंदू हिंदू हिंदू चिल्लाकर कोई सभा की अग्रवाल महिला है और इसके साथ में जो भी लोग हैं उन सभी का एनकाउंटर होना चाहिए। क्योंकि जिन धाराओं में मुकदमे प्रशासन करती है ना उन पर जेल या कठोर कारावास नहीं होता है थाने से ही जमानत दे दी जाती है प्रशासन खुद कठपुतली बने घूम रहा है।
जब तक समाज जागरूक नहीं होगा तब तक यह हिंदू संगठन ऐसा ही शोषण करते रहेंगे,,, और यह वह हिंदू वादी है न जाने किस-किस का मांस खा लेते हैं फिर कहते हैं हम हिंदू हैं घर में रोटी खाने को नहीं फिर भी हम हिंदू हैं एक किसी ने गाय पाली नहीं कहते हिंदू हैं गौ माता की रक्षा करने चले, जब वह हिंदू संगठन कहां जाते हैं जब गौ माता कूड़े कचरे में खाना ढूंढते हैं,,,
मोदीनगर कश्यप समाज अभी तक आगे आकर के ना तो इस बाबत पंचायत करी ना डीएम एसपी से मिला आखिर क्या कारण?
यूपी, गाजियाबाद के मोदीनगर में दीपा और उनकी मां सुमन एक गाय लेकर जा रही थी।
हिंदू संगठन से जुड़े लोगों ने गौकशी के लिए गाय ले जाने का आरोप लगा कर इन्हें रोक लिया।
मां-बेटी ने लाख समझाया कि वो भी हिंदू है, और गाय को पालने के लिए लेकर जा रहे है।
लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई।
माँ बेटी को सरेराह थप्पड़ों से पीटा गया।
पुलिस ने मां बेटी की पिटाई करने वाली हिंदू संगठन से जुड़ी आरोपी सपना अग्रवाल समेत 3 पर केस दर्ज किया है।
ऐसे ही भारत की कल्पना हम कर रहे थे ना…
योगी बाबा का उत्तम प्रदेश. यहां जब से इनकी सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं
किस कदर नफरत लोगों में फैल गई है बताइए नफरत के आगे कुछ दिखाई नहीं देता कौन क्या है यह समझ ही नहीं आता इन सब लोगों को पकड़ के मारना चाहिए यह नफरत भरी गंदगी जो समाज में फैला रहे
गाजियाबाद का पुलिस प्रशासन इस महिला के ऊपर कठोर कार्रवाई करें, पुलिस इनका एनकाउंटर करे अन्यथा कोई भी ओबीसी एससी एसटी गाय नहीं पालेगा पीएम मानवता के विरुद्ध है क्योंकि फर्जी गौ प्रेमियों से असली गौ प्रेमियों को बहुत बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के मोदीनगर में एक माँ और बेटी को केवल संदेह के आधार पर रोकना, सार्वजनिक रूप से अपमानित करना और मारपीट करना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। यदि वे वास्तव में गाय को पालने के लिए ले जा रही थीं, तो कानून अपने हाथ में लेने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
भारत का संविधान किसी भी व्यक्ति को भीड़ बनाकर फैसला सुनाने या सज़ा देने का अधिकार नहीं देता। यह अधिकार केवल न्यायालय और कानून को है। चाहे पीड़ित किसी भी जाति, समुदाय या धर्म का हो, उसके साथ समान न्याय होना चाहिए।
यदि किसी ने अपराध किया है, तो पुलिस निष्पक्ष जांच करे और दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करे। लेकिन किसी व्यक्ति या समूह के “एनकाउंटर” की मांग करना न्याय नहीं, बल्कि कानून के शासन के सिद्धांत के विरुद्ध है।
गौ-रक्षा के नाम पर यदि निर्दोष लोगों के साथ मारपीट होती है, तो इससे न केवल समाज में भय फैलता है बल्कि वास्तविक गौ-सेवा करने वाले लोगों का भी मनोबल टूटता है। यदि किसी को संदेह हो कि कोई अपराध हो रहा है, तो उसका कर्तव्य पुलिस को सूचना देना है, स्वयं हिंसा करना नहीं।
समाज को नफरत, अफवाह और भीड़तंत्र से नहीं, बल्कि कानून, संवैधानिक मूल्यों और आपसी सम्मान से चलना चाहिए। दोषी चाहे किसी भी संगठन, जाति या धर्म से हों, उनके विरुद्ध निष्पक्ष और कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। यही न्याय है और यही लोकतंत्र की पहचान है।
AKS