Spread the love

viral घटना जुलाई 2025 की है,सुबह का समय था। पीलीभीत के न्यूरिया क्षेत्र के गांव मंडरिया के आसपास फैले गन्ने के खेतों पर हल्की धूप पड़ने लगी थी। खेतों में हर दिन की तरह लोग अपने काम में जुटने लगे थे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि गन्ने की ऊंची फसलों के बीच एक खूंखार बाघ घात लगाए बैठा है और कुछ ही पलों में सब कुछ बदलने वाला है।

बृहस्पतिवार की सुबह करीब साढ़े सात से आठ बजे के बीच 17 वर्षीय नीलेश अपने दोस्त हरवंश और एक अन्य साथी के साथ गांव के बाहर स्थित गन्ने के खेत में घास काटने के लिए निकला था। तीनों हंसते-बातें करते हुए खेत की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन गन्ने के उन घने खेतों के बीच एक ऐसा खतरा छिपा था, जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था।

नीलेश और हरवंश खेत के अंदर पहुंच चुके थे, जबकि उनका तीसरा साथी सड़क के पास ही था। चारों ओर सन्नाटा था। तभी अचानक गन्नों के बीच तेज सरसराहट हुई।

इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, एक विशाल बाघ बिजली की रफ्तार से गन्नों के बीच से निकला और नीलेश पर टूट पड़ा।

कुछ ही सेकंड में नीलेश जमीन पर था और सामने था जंगल का सबसे खतरनाक शिकारी।

उस पल नीलेश को लगा कि शायद अब उसका बचना मुश्किल है। लेकिन उसने हार नहीं मानी। मौत को सामने देखकर उसने वही किया, जो शायद कोई सोच भी नहीं सकता था। उसने पूरी ताकत से बाघ की गर्दन पकड़ ली।

एक तरफ बाघ अपने नुकीले पंजों और ताकतवर जबड़ों से हमला कर रहा था, तो दूसरी तरफ 17 साल का एक किशोर अपनी जिंदगी बचाने के लिए पूरी ताकत से उससे जूझ रहा था।

नीलेश के शरीर से खून बहने लगा, लेकिन उसने बाघ की गर्दन नहीं छोड़ी।

अपने दोस्त को मौत से लड़ते देख हरवंश भी पीछे नहीं हटा।

बिना अपनी जान की परवाह किए हरवंश सीधे बाघ की तरफ दौड़ पड़ा। उसने पीछे से बाघ की पीठ और शरीर को पकड़कर पूरी ताकत से खींचना शुरू कर दिया।

अब वहां एक नहीं, बल्कि दो दोस्त मौत के सामने डटकर खड़े थे।

दोनों लगातार शोर मचाते रहे, चिल्लाते रहे और बाघ से संघर्ष करते रहे। यह संघर्ष करीब दो मिनट तक चला, लेकिन उन दो मिनटों में दोनों दोस्तों ने मौत को बेहद करीब से देखा।

आखिरकार शोर, संघर्ष और दोनों दोस्तों के साहस के आगे बाघ पीछे हट गया। वह नीलेश को छोड़कर तेजी से जंगल की ओर भाग गया।

लेकिन खतरा अभी टला नहीं था।

नीलेश बुरी तरह घायल हो चुका था। उसका पूरा शरीर खून से लथपथ था। ऐसी हालत में भी हरवंश ने दोस्त का साथ नहीं छोड़ा। उसने घायल नीलेश को संभाला और गांव की ओर दौड़ पड़ा।

रास्ते में जब नीलेश चल नहीं पाया, तो हरवंश ने उसे गोद में उठाया और अस्पताल तक पहुंचाने में मदद की। इस दौरान उसके अपने कपड़े भी नीलेश के खून से पूरी तरह सन गए थे।

जिला अस्पताल में भर्ती नीलेश आज भी उस खौफनाक मंजर को याद करता है, तो उसके चेहरे पर डर, हैरानी और राहत के मिले-जुले भाव दिखाई देते हैं।

यह सिर्फ बाघ के हमले की कहानी नहीं है, बल्कि यह दोस्ती, साहस और जिंदा रहने की अदम्य इच्छा की कहानी है। उस दिन अगर नीलेश ने हिम्मत नहीं दिखाई होती और हरवंश ने दोस्त का साथ नहीं दिया होता, तो शायद यह कहानी कुछ और ही होती।

घायल नीलेश को ले जाता हरवंश की असली तस्वीर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

×