वही सच की राह में अक्सर बेड़ियों से सजाए जाते हैं।
कैद कर सकते हो जिस्म को, विचारों को नहीं,
देशभक्ति झुकती नहीं, सत्ता के दरबारों में।
जो हिमालय की पीड़ा को हिंदुस्तान की आवाज़ बनाते हैं,
इतिहास गवाह है, ऐसे लोग ही देश का भविष्य बचाते हैं।
सलाम उन हर आवाज़ों को, जो भारत के हित में उठती हैं
देश पहले, सत्ता बाद में… यही सच्ची राष्ट्रभक्ति कहलाती है।।
देश के अंदर यह अघोषित इमरजेंसी है सोनम वांगचुक देश के भविष्य के लिए सिर्फ एक इस्तीफा मांग रहे थे लेकिन सत्ता के नशे में चूर सरकार कोई भी फैसला लेने में असमर्थ है।